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मनरेगा में महाघोटाला! सरंडा पंचायत में फर्जी मजदूरों से सरकारी धन की लूट, IGRS शिकायत के बाद भी प्रशासन मौन

जनपद गोरखपुर के पिपराइच ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सरंडा में मनरेगा योजना को लूट का अड्डा बना दिया गया है। यहां गरीब मजदूरों के नाम पर ऐसा खेल खेला गया है, जिसे देखकर साफ कहा जा सकता है कि यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है।

समाज तक डिजिटल की डिजिटल पड़ताल में सामने आया है कि 13 जनवरी 2026 से 25 जनवरी 2026 तक मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर फर्जी मजदूर दिखाकर भुगतान कराया गया। सरकार ने पारदर्शिता के लिए NMMS ऐप लागू किया, लेकिन सरंडा पंचायत में इसी ऐप को धोखे का औजार बना दिया गया।

📸 एक फोटो, दस मजदूर – सिस्टम को खुली चुनौती

जांच में साफ हुआ कि—

पूरे दिन की हाजिरी में सिर्फ एक बार फोटो अपलोड किया गया।

एक व्यक्ति के नाम पर दूसरे की फोटो लगाकर मजदूरी निकाली गई।

मोबाइल में पहले से मौजूद तस्वीरों से हाजिरी बनाई गई।

जहां जमीन पर 1–2 मजदूर थे, वहां कागजों में 10 मजदूर दिखाए गए।

पुरुष की जगह महिला और महिला की जगह पुरुष की फोटो लगाकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।

यह सब देखकर यह मानना मुश्किल नहीं कि यह खेल ऊपर तक संरक्षण के बिना चल सकता है।

📅 दिनवार फर्जी मजदूरों का खुलासा

13 जनवरी – 94 मजदूर

14 जनवरी – 93 मजदूर

15 जनवरी – 88 मजदूर

16 जनवरी – 81 मजदूर

17 जनवरी – 70 मजदूर

18 जनवरी – 79 मजदूर

19 जनवरी – 79 मजदूर

20 जनवरी – 78 मजदूर

21 जनवरी – 78 मजदूर

22 जनवरी – 30 मजदूर

23 जनवरी – 29 मजदूर

24 जनवरी – 18 मजदूर

25 जनवरी – 18 मजदूर

📑 ये मास्टर रोल शक के घेरे में

4736, 4737, 4738, 4739, 4740, 4741, 4775, 4776, 4777, 4792, 4793, 4794

इन मास्टर रोल में दर्ज उपस्थिति और फोटो का मिलान नहीं बैठता। यह सीधा-सीधा सरकारी खजाने पर हाथ साफ करने का मामला है।

🧾 IGRS पर शिकायत, फिर भी सन्नाटा

इस पूरे मामले को लेकर IGRS पोर्टल पर शिकायत संख्या – 40018826004280 दर्ज कराई जा चुकी है।

सिर्फ शिकायत ही नहीं, बल्कि फोटो, स्क्रीनशॉट और डिजिटल साक्ष्य के साथ उच्च अधिकारियों को औपचारिक रूप से सूचित भी किया गया है।

अब सवाल यह है—

जब शिकायत नंबर मौजूद है,

जब सबूत अधिकारियों की मेज पर पहुंच चुके हैं,

तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं?

क्या यह चुप्पी

👉 प्रशासन की लाचारी है

या

👉 भ्रष्टाचारियों को मिला संरक्षण?

⚖️ कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

मनरेगा गरीबों की रोजी-रोटी की योजना है, लेकिन सरंडा में इसे लूट का साधन बना दिया गया है। यह केवल सरकारी धन की चोरी नहीं, बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर डाका है।

मांग की जा रही है कि—

सभी संदिग्ध मास्टर रोल की विशेष जांच कराई जाए।

दोषी प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी स्टाफ पर FIR दर्ज हो।

सरकारी धन की रिकवरी कराई जाए।

पूरे मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दर्ज किया जाए।

अगर प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदी रखीं, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।

अब देखना यह है कि गोरखपुर प्रशासन

गरीब मजदूरों के साथ खड़ा होता है

या

घोटालेबाजों के साथ।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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