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सीएचसी लालगंज बना गरीबों की मजबूरी का अड्डा? बाहरी दवा, बाहरी जांच के आरोप… सवाल पूछने पर पत्रकार से अभद्रता! आखिर कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?
“गरीबों के इलाज पर सवाल, पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास? सीएमओ की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न, डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग”
रायबरेली।
जनपद रायबरेली का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लालगंज एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। अस्पताल पर लगातार यह आरोप लग रहे हैं कि गरीब मरीजों को सरकारी सुविधाओं का लाभ देने के बजाय बाहर से जांच कराने और निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। मरीजों के साथ दुर्व्यवहार और अव्यवस्थाओं की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।
इसी बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने पहुंचे एक पत्रकार के साथ कथित अभद्रता और सवाल पूछने से रोकने का मामला सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल वीडियो के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या सरकारी अस्पतालों में जनता के हित के सवाल पूछना भी अब अपराध बनता जा रहा है?
यदि सरकारी अस्पताल में दवा और जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो मरीजों को बाहर क्यों भेजा जा रहा है? यदि आरोप सही हैं, तो इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहा है, जिनके पास निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों का खर्च उठाने की क्षमता नहीं होती।
सबसे बड़ा सवाल रायबरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। यदि लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही हैं, तो आखिर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की गई? क्या स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों पर गंभीर है या फिर सब कुछ शिकायतों तक ही सीमित रह गया है?
जिलाधिकारी श्रीमती सरनीत कौर ब्रोका से जनहित में मांग की जा रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में बाहरी दवा, बाहरी जांच, मरीजों के साथ दुर्व्यवहार अथवा पत्रकार से अभद्रता जैसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकारी अस्पताल जनता की सेवा के लिए हैं, किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जवाबदेही से बचने का माध्यम नहीं। लोकतंत्र में पत्रकार और आम नागरिक जनता के हित में सवाल पूछते रहेंगे। अब यह स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने रखे और यदि कहीं अनियमितता है तो उसे तत्काल समाप्त करे। जनता अब जवाब चाहती है, केवल आश्वासन नहीं।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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