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समाज तक डिजिटल जांच में बड़ा खुलासा

गोरखपुर जनपद के विकासखंड पिपराइच अंतर्गत ग्राम पंचायत नयापार खुर्द में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़ा घोटाला और सुनियोजित फर्जीवाड़ा सामने आया है।

समाज तक मीडिया द्वारा 11 जनवरी 2026 से 25 जनवरी 2026 तक की गई डिजिटल पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि मजदूरों की उपस्थिति पूरी तरह फर्जी तरीके से दर्ज की गई है और भारत सरकार की एनएमएमएस (NMMS) प्रणाली की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

मनरेगा नियमों के अनुसार प्रत्येक मजदूर की कार्य प्रारंभ व कार्य समाप्ति पर दो बार फोटो अपलोड करना अनिवार्य है, लेकिन ग्राम पंचायत नयापार खुर्द में केवल एक बार फोटो अपलोड कर

👉 नाम किसी और का

👉 फोटो किसी और की

👉 मोबाइल से मोबाइल फोटो डालकर

सरकारी रिकॉर्ड में मजदूर दिखाए जा रहे हैं।

यानी कागजों में मजदूर, जमीन पर मजदूर नहीं — और भुगतान जारी।

📊 फर्जी मजदूरों का डिजिटल ब्योरा

11 जनवरी 2026 – 75 मजदूर

12 जनवरी 2026 – 75 मजदूर

13 जनवरी 2026 – 38 मजदूर

14 जनवरी 2026 – 38 मजदूर

15 जनवरी 2026 – 82 मजदूर

16 जनवरी 2026 – 82 मजदूर

17 जनवरी 2026 – 82 मजदूर

18 जनवरी 2026 – 82 मजदूर

19 जनवरी 2026 – 80 मजदूर

20 जनवरी 2026 – 80 मजदूर

21 जनवरी 2026 – 80 मजदूर

22 जनवरी 2026 – 42 मजदूर

23 जनवरी 2026 – 41 मजदूर

24 जनवरी 2026 – 39 मजदूर

25 जनवरी 2026 – 39 मजदूर

➡ कुल फर्जी मजदूर-दिवस: 955

मनरेगा मजदूरी दर ₹252 प्रतिदिन के अनुसार:

➡ 955 × 252 = ₹2,40,660

💰 यानी सीधे शब्दों में —

दो लाख चालीस हजार छह सौ साठ रुपये की सरकारी लूट!

🔥 गरीबों के हक पर डाका

यह घोटाला सिर्फ पैसों की लूट नहीं, बल्कि

▪ गरीब मजदूरों के अधिकारों का हनन

▪ भारत सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का मज़ाक

▪ मनरेगा अधिनियम और एनएमएमएस नियमों का खुला उल्लंघन है।

जहां एक तरफ सरकार पारदर्शिता की बात करती है, वहीं नयापार खुर्द ग्राम पंचायत में मनरेगा को लूट का अड्डा बना दिया गया है।

⚠️ सवालों के घेरे में पंचायत और अधिकारी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

▪ जब मजदूर मौके पर नहीं थे तो भुगतान किस आधार पर हुआ?

▪ एक ही तरह की फोटो बार-बार कैसे अपलोड हुई?

▪ तकनीकी निगरानी कैसे फेल हुई?

▪ जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं?

यह पूरा मामला ग्राम प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

📢 शिकायत दर्ज, अब प्रशासन की परीक्षा

फिलहाल इस पूरे प्रकरण की शिकायत

➡ भारत सरकार

➡ प्रमुख सचिव (ग्रामीण विकास)

➡ मनरेगा लोकपाल

➡ जिलाधिकारी गोरखपुर

➡ मुख्य विकास अधिकारी

➡ पिपराइच थाना प्रभारी

सहित सभी संबंधित विभागों को डिजिटल साक्ष्यों के साथ भेज दी गई है।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि

👉 खबर प्रकाशित होने के बाद

👉 जांच होती है या नहीं

👉 एफआईआर दर्ज होती है या नहीं

👉 और दोषियों पर ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

✊ समाज तक की मांग

समाज तक मीडिया की स्पष्ट मांग है कि—

✔ तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

✔ दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो

✔ सरकारी धन की रिकवरी हो

✔ पंचायत को ब्लैकलिस्ट किया जाए

✔ तकनीकी सत्यापन टीम की भूमिका की भी जांच हो

यदि इस घोटाले पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साबित होगा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार करने वालों को खुली छूट है।

✍ रिपोर्ट: विजय प्रताप सिंह

स्वतंत्र पत्रकार व समाजसेवी

समाज तक डिजिटल मीडिया

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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