
गोरखपुर।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को देश-प्रदेश में एक ईमानदार, सख्त और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में जाना जाता है। उनकी सरकार की पहचान “जीरो टॉलरेंस” है।
लेकिन उन्हीं के गृह जनपद गोरखपुर के ब्लॉक पिपराइच की ग्राम पंचायत अराजी चौरी में मनरेगा योजना को जिस तरह से चलाया जा रहा है, वह सरकार की इसी छवि को धूमिल करने की साजिश जैसा प्रतीत हो रहा है।
दिनांक 10 जनवरी 2026 से 21 जनवरी 2026 के बीच की डिजिटल पड़ताल में सामने आया कि मनरेगा में
काम कम और हाजिरी ज्यादा,
मजदूर कम और फोटो ज्यादा,
और नियमों से ज्यादा “जुगाड़ व्यवस्था” चल रही है।
📌 संदिग्ध मास्टर रोल
➡ मास्टर रोल संख्या 4752
➡ मास्टर रोल संख्या 4753
मनरेगा नियम स्पष्ट हैं कि कार्यस्थल पर श्रमिक की दो बार लाइव फोटो ली जानी चाहिए और फोटो उसी व्यक्ति की होनी चाहिए जिसका नाम मास्टर रोल में दर्ज है।
लेकिन अराजी चौरी में —
• दो फोटो की जगह एक फोटो
• महिला के नाम पर पुरुष की फोटो
• स्टोरेज फोटो का उपयोग
• मोबाइल से मोबाइल फोटो अपलोड
जैसी गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं।
अब सवाल यह नहीं है कि गड़बड़ी हुई या नहीं,
सवाल यह है कि
इतनी स्पष्ट अनियमितताओं के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
📰 सच्चाई लिखने पर पत्रकार को फंसाने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, जब इस भ्रष्टाचार को उजागर करने का प्रयास किया गया, तो पहले पत्रकार के खाते में बिना अनुमति धनराशि भेजी गई और फिर उसी धनराशि को आधार बनाकर उसे फंसाने की रणनीति बनाई गई।
जब खबर दबाने से इनकार किया गया, तो साइबर सेल की आड़ लेकर झूठी शिकायतें कर दी गईं।
यह केवल भ्रष्टाचार नहीं,
यह प्रेस की आवाज दबाने का प्रयास है,
और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है।
🏛️ शिकायत दर्ज, साक्ष्य संलग्न
इस पूरे प्रकरण को लेकर
मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।
साथ ही यह शिकायत
भारत सरकार के प्रमुख सचिव,
जिलाधिकारी गोरखपुर,
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) गोरखपुर,
मनरेगा लोकपाल
एवं मनरेगा से जुड़े अन्य संबंधित अधिकारियों को
शिकायती पत्र व डिजिटल साक्ष्यों (फर्जी फोटो, संदिग्ध मास्टर रोल, डिजिटल हाजिरी डेटा) के साथ भेजी गई है।
अब यह मामला केवल मीडिया की खबर नहीं रहा,
बल्कि यह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मामला बन चुका है।
❓ अफसरों की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल
यदि मास्टर रोल संदिग्ध हैं,
यदि फोटो फर्जी हैं,
तो निस्तारण किस आधार पर किया गया?
क्या अधिकारियों को सच्चाई दिखाई नहीं दी
या
सच्चाई देखना ही नहीं चाही गई?
यही कारण है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि
क्या कुछ अधिकारी
योगी सरकार की ईमानदार छवि को
जानबूझकर बदनाम कर रहे हैं?
✊ समाज तक की मांग
समाज तक पोर्टल मांग करता है कि —
मास्टर रोल संख्या 4752 व 4753 की उच्चस्तरीय जांच हो
ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक व तकनीकी सहायक की भूमिका तय की जाए
डिजिटल हाजिरी की फॉरेंसिक जांच कराई जाए
झूठी रिपोर्ट लगाकर मामला दबाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो
पत्रकारों को डराने-धमकाने की प्रवृत्ति पर कठोर दंड हो
यह लड़ाई किसी सरकार के खिलाफ नहीं,
यह लड़ाई सरकार की छवि बचाने की है।
यह लड़ाई गरीब मजदूर के हक की है।
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई,
तो लोग यही कहेंगे —
योगी सरकार ईमानदार है,
लेकिन
नीचे बैठे कुछ लोग सरकार को बदनाम कर रहे हैं।
✍️ — संपादक
समाज तक पोर्टल

