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9 इंच लंबी मूंछ बनी पहचान, दतौली गांव के परमसुख कोरी इलाके में बने ‘मूंछों वाले बाबा

लालगंज (रायबरेली):

दतौली गांव निवासी परमसुख पुत्र रामेश्वर कोरी (उम्र लगभग 65 वर्ष) अपनी अनोखी और करीब 9 इंच लंबी मूंछों को लेकर पूरे क्षेत्र में अलग पहचान बना चुके हैं। उनकी मूंछें न केवल उनकी शान हैं, बल्कि वर्षों से उनकी पहचान भी बन गई हैं।

परमसुख बताते हैं कि उन्होंने जीवन में सिर्फ एक बार मूंछों की कटाई कराई थी, इसके बाद आज तक कभी मूंछ नहीं कटवाई। उनका मानना है कि मूंछ मर्द की शान होती है और समाज में सम्मान की प्रतीक भी होती है।

परमसुख के दो बेटे अजय और विजय रोज़गार के सिलसिले में परदेश में नौकरी करते हैं, जबकि वे स्वयं गांव में पत्नी रामरानी के साथ रहते हैं। जीवनयापन के लिए उन्हें सरकार से वृद्धा पेंशन मिलती है और साथ ही बकरी पालन कर वे अपना गुजर-बसर कर रहे हैं।

मूंछों के शौक को लेकर परमसुख कहते हैं—

“आजकल के लड़कों के शौक बदल गए हैं, लेकिन हमारी पीढ़ी में मूंछें सम्मान और पहचान का प्रतीक थीं। जब लोग मुझे मूंछों से पहचानते हैं, तो अच्छा लगता है।”

आज भी परमसुख की मूंछें गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। लोग उन्हें दूर से देखकर पहचान लेते हैं और कई बार उनकी मूंछों के साथ फोटो भी खिंचवाते हैं।

गांव में अब परमसुख कोरी को लोग नाम से कम और

“मूंछों वाले बाबा” के नाम से ज्यादा जानते हैं।

रिपोर्ट – संतोष कुमार

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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