सतांव,रायबरेली जनपद में डेंगू बुखार धीर-धीरे पैर पसार रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग सतर्क नही हैं।”स्वभाव स्वच्छता,संस्कार स्वच्छता’’ थीम पर आधारित ‘स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा'(१४सितम्बर से ०१ अक्तूबर)आयोजित किया गया,लेकिन इस पखवारे मे सताँव ब्लाॅक मे कहीं भी सफाई का अभियान नहीं चलाया गया।सरकार की ‘स्वच्छ भारत-स्वस्थ’ भारत की मंशा को स्वास्थ्य,ग्राम्य विकास व पंचायती राज विभाग मिल कर पलीता लगा रहे हैं।गाँवों मे लगे कूड़े के ढेर,बजबजाती और कीचड़ से उफनाती नालियां इस बात का प्रमाण हैं कि सफाई कर्मी गाँवों की सूरत देखने नहीं जाते।
बीते कुछ दिनों से हो रही बारिश में ब्लॉक के दर्जनों गांवों के जल भराव,कीचड़ व गन्दगी की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वे पंचायतों के माध्यम से गांवो में कराए गए विकास कार्यों पर बड़ा सवाल खड़ी करती हैं। यह तस्वीरें गावों में सफाई के लिए तैनात किए गए सफाई कर्मचारियों और उन्हें हांकने वाली प्रशासनिक मशीनरी की घोर लापरवाही और कामचोरी का आईना है।क्षेत्र की कोंसा,ओनई पहाड़पुर,सतांव, डोमापुर,रवला,बांस,अटौरा बुजुर्ग, सनिका मऊ,देदौर,दरीबा,मनेहरु, बरदर,चंदवल व चंदई रघुनाथ पुर ग्राम पंचायतो के अनेक गांवों में नालियों की सफाई नहीं हुई जिससे डेंगू जैसी घातक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।आए दिन लोग बुखार से पीड़ित हो रहे हैं।कोंसा के पूरे काली बक्श, अमवन,खगिया खेड़ा,दल्ली खेड़ा,बंडे व भागी खेड़ा गांवो में नालियों की सफाई नहीं की गई।कोंसा ग्राम पंचायत में करीब दो साल से सफाई कर्मी नालियों की सफाई करने नही आया।ग्रामीण बताते हैं कि दो साल से यहां कोई सफाई कर्मी नलियों की सफाई करने नही आया।भागी खेड़ा, अमवन गांव में सड़क किनारे नालियों का निमार्ण न होने से गंदा पानी सड़क पर बह रहा है।इन गाँवों में बीते दो साल से कोई विकास कार्य नहीं कराया गया।दरअसल गांवों में गलियों, सड़को,नालियों व खडंजो के निर्माण की जिम्मेदारी जिन्हे सौंपी गई थी,वे तो फर्श से अर्श तक पहुंच गए लेकिन गाव और वहां रह रहे ग्रामीण आज भी पहले जैसे जलभराव कीचड़,गन्दगी और बदबू के परिवेश में जिन्दगी काट रहे हैं।नालियों की सफाई न किए जानें की खबरें अक्सर मीडिया की सुर्खियां बनती है लेकिन उच्चाधिकारी हमेशा नजरंदाज कर देते हैं।परिणाम है कि रुतबेदार सफाई कर्मचारी अपने आप को बादशाह समझने लगे हैं।
सफाई के अभाव मे संक्रामक बीमारियों ने पैर फैलाना शुरू कर दिया है।डेंगू ने दस्तक दे दी है।बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार द्वारा चलाया जाने वाला हर अभियान सिर्फ कागजों मे ही दम तोड़ता रहेगा या जमीन पर भी कुछ दिखाई देगा। सताँव ब्लाॅक की बात करें तो यहाँ ७२ राजस्व गाँवों मे ८० सफाई कर्मी नियुक्त हैं।आधा दर्जन दिन भर ब्लाॅक कार्यालय मे टहल घूम कर वेतन ले रहे हैं।इतने ही बड़े अफसरों की चाकरी मे लगे हैं। आखिर सफाई करे,तो कौन करे?
????धीरे-धीरे पैर पसार रहा डेंगू,कदाचार की भेंट चढ़ गया स्वच्छता ही सेवा पखवारा!”””””””””””””●सताँव मे कहीं नही चला सफाई अभियान,दो-दो साल से गाँवो मे नही गये सफाई कर्मी””””””””””””

