भरकर कलेजे में दम बोलती है,मीठे वचन किन्तु कम बोलती है,जहां पर सामाजिक व्यवस्था बिगड़ती,वहां पर हमारी कलम बोलती है,

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भरकर कलेजे में दम बोलती है,
मीठे वचन किन्तु कम बोलती है,
जहां पर सामाजिक व्यवस्था बिगड़ती,
वहां पर हमारी कलम बोलती है,
ललितपुर में बतौर एसपी अभिषेक कुमार अग्रवाल का मात्र 4 महीने का कार्यकाल, यहां सिर्फ जनता की अनसुनी, 22 जुलाई 2023 को एसपी की अनसुनी से खफा एक पीड़ित पुष्पेंद्र ने सीएम योगी के जनता दरबार में जहर खाकर जान देने की कोशिश की, लिहाजा इन्हें ललितपुर से चलता कर दिया गया, उसके बाद सिद्धार्थ नगर पहुंचे एसपी की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ, यहां भी पीड़ितों और फरियादियों की अनसुनी जारी रही, शिकायतों के बाद 5 महीने में ही सिद्धार्थनगर से हटकर रायबरेली भेज दिया गया। यहां भी अनसुनी जारी है, पुलिसिंग का नाम मात्र अनुभव ही रायबरेली में जातीय संघर्ष के आसार पैदा करने का कारण बना। अभिषेक कुमार अग्रवाल की कार्यशाली का ही नतीजा है कि कांग्रेस और सपा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी भाजपा को दलित विरोधी बताने का मौका मिल गया। नसीराबाद कांड में एसपी की जल्दबाजी में की गई कार्रवाई योगी सरकार के गले की फांस बन गई है। गोली मारकर की गई युवक की हत्या संवेदना और न्याय का विषय नहीं रहा अब राजनीति का मुद्दा बन गया है। खैर रायबरेली में तो यही माना जा रहा है कि एसपी अभिषेक अग्रवाल की कार्यशैली ने योगी की छवि धूमिल की और उपचुनाव के ठीक पहले भाजपा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाया। ✍️अनुज अवस्थी

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Author: Samaj Tak

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