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थाने की दहलीज पर ‘अंधेर नगरी’, ओनई के भाइयों का गुंडागर्दी केंद्र!

​स्थान: गुरुबक्शगंज थाना के ठीक सामने, रायबरेली
दुकान: राधे-राधे स्वीट्स एंड नमकीन
संचालक: रमेश और सुभाष (निवासी: ओनई ग्राम पंचायत)
​      : सावधान! गुरुबक्शगंज थाने के सामने ‘ज़हर’ परोस रहे ओनई के दो भाई, ₹10 की चाय के नाम पर ₹500 के नोट से ‘अवैध वसूली’ और अभद्रता का नंगा नाच!
​थाने की नाक के नीचे खुलेआम लूट!
​जनपद रायबरेली के गुरुबक्शगंज थाने के ठीक सामने स्थित ‘राधे-राधे स्वीट्स’ के संचालक रमेश और सुभाष ने व्यापार को गुंडागर्दी का अड्डा बना दिया है। थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर ओनई ग्राम पंचायत में रहने वाले इन भाइयों को शायद कानून का कोई खौफ नहीं है। यहाँ आने वाला आम ग्राहक अपनी जेब ढीली करने के साथ-साथ अपना आत्मसम्मान भी गंवा कर जाता है।
​₹10 की चाय और ‘डकैती’ का नया मॉडल
​’समाज तक मीडिया’ की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहाँ ग्राहकों को ठगने का एक सुनियोजित जाल बिछाया गया है:
​भ्रम की दुकान: एक ही टेबल, एक ही छत, लेकिन भुगतान के वक्त ‘दो दुकान’ का राग अलापा जाता है।
​₹500 का नोट और गायब हिसाब: एक आम नागरिक जब काउंटर पर ₹500 का नोट देकर पूरा भुगतान समझकर चलने लगता है, तो उसे अपराधी की तरह सार्वजनिक रूप से रोका जाता है।
​अभद्रता की इंतहा: ₹10 की चाय के नाम पर ₹500 का नोट लिया गया और वापस मात्र ₹90 दिए गए। जब पीड़ित ग्राहक ने अपने मेहनत के ₹400 वापस मांगे, तो ओनई निवासी इन भाइयों ने ऊँची आवाज में ‘तू-तड़ाक’ और बदतमीजी शुरू कर दी। क्या ₹10 की चाय के लिए किसी की सरेआम बेइज्जती करना इन भाइयों का पुश्तैनी अधिकार है?
​सेहत से खिलवाड़: कड़ाही में ‘काला ज़हर’ और सड़ी मिठाइयां!
​दुकान के भीतर झांकने पर जो मंजर दिखता है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
​कैंसर परोसती कड़ाही: यहाँ समोसे और नमकीन जिस तेल में तले जा रहे हैं, वह इतना काला और गंदा है कि उसे नालियों के पानी से कम नहीं कहा जा सकता।
​बीमारी का आमंत्रण: बार-बार जलाया हुआ यह तेल सीधा कैंसर और हृदय रोगों को न्योता दे रहा है। ओनई के इन भाइयों को केवल जनता की जेब काटने से मतलब है, किसी की जान जाए तो जाए। क्या खाद्य विभाग (Food Safety) ने इन समोसों में तैरते ‘ज़हर’ को कभी अपनी लैब में जांचा है?
​प्रशासन से ‘समाज तक मीडिया’ के तीखे सवाल
​हम प्रशासन का सम्मान करते हैं, लेकिन सवाल तो उठेगा ही:
​थाने के ठीक सामने सरेआम अभद्रता और अवैध कटौती करने की हिम्मत इन भाइयों में कहाँ से आई?
​क्या ओनई ग्राम पंचायत के इन दबंगों को ग्राहकों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न करने का लाइसेंस मिला हुआ है?
​आखिर क्यों अब तक इस ‘बीमारी की दुकान’ पर खाद्य विभाग का ताला नहीं लगा?
​निष्कर्ष: जनता का हित सर्वोपरि
​’समाज तक मीडिया’ स्पष्ट कर देना चाहता है कि किसी भी सूरत में आम जनमानस का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रमेश और सुभाष कान खोलकर सुन लें—दुकानदारी तहजीब से चलती है, तानाशाही से नहीं। यदि ₹10 की चाय के नाम पर ₹500 के नोट हड़पने और गंदा खाना खिलाने का सिलसिला बंद नहीं हुआ, तो यह लड़ाई आर-पार की होगी।
​क्षेत्र की जनता से अपील: अपनी सेहत और सम्मान को दांव पर न लगाएं। ऐसी जगहों का बहिष्कार करें जहाँ ग्राहक को अपराधी समझा जाता है।
​रिपोर्टर: विजय प्रताप सिंह
ब्यूरो: समाज तक मीडिया, रायबरेली
दिनांक: 25 मार्च, 2026 समय शाम 7 बजे तक़रीबन

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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