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सावधान! बैंक मित्रों के बीच सक्रिय ‘फर्जी संगठन’ और वसूली का खेल? विजय प्रताप सिंह ने दी खुली चुनौती

रायबरेली/मऊ।

बैंकिंग सेवा प्रदाता यानी बैंक मित्रों (CSP) के बीच इन दिनों एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। खुद को कभी विभव सिंह तो कभी नीरज सिंह बताकर पहचान बदलने वाले इस व्यक्ति पर बैंक मित्रों को भ्रमित करने और संगठन के नाम पर अवैध वसूली के प्रयास के गंभीर आरोप लगे हैं।

पहचान का संकट: कौन है यह ‘मुखौटा’ धारी?

​सूत्रों के अनुसार, उक्त व्यक्ति पूर्व में ‘सीएसपी वेलफेयर एसोसिएशन’ से मौखिक रूप से उपाध्यक्ष के तौर पर जुड़ा था। बताया जा रहा है कि संगठन की सख्त नियमावली और वित्तीय पारदर्शिता से परेशान होकर उसने रास्ता अलग कर लिया। संगठन का स्पष्ट नियम है कि केवल सक्रिय बैंक मित्र (सीएसपी संचालक) ही इसके सदस्य बन सकते हैं, जबकि आरोपित व्यक्ति के बैंक मित्र होने पर ही सवाल उठ रहे हैं।

‘इंटरनेशनल’ संगठन का सपना और हकीकत

​आरोप है कि संगठन से अलग होने के बाद इस व्यक्ति ने ‘इंटरनेशनल’ स्तर का संगठन बनाने का झांसा देकर बैंक मित्रों को जोड़ना शुरू किया। हालांकि, जांच में इस तथाकथित संगठन का न तो कोई पंजीकरण (Registration) सामने आया है, न ही कोई आधिकारिक बैंक खाता। बैंक मित्रों का आरोप है कि सदस्यता के नाम पर उनसे धन उगाही की कोशिश की गई, लेकिन जब वैधानिक दस्तावेजों की मांग की गई, तो आरोपित चुप्पी साध गया।

प्रदेश अध्यक्ष की ‘खुली चुनौती’

​इस पूरे प्रकरण पर सीएसपी वेलफेयर एसोसिएशन (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आरोपित व्यक्ति को सार्वजनिक मंच या वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सामने आने की चुनौती दी है।

​”संगठन में हर एक रुपये का हिसाब बैंक खाते के जरिए पारदर्शी तरीके से रखा जाता है। यदि उस व्यक्ति के पास कोई भी तथ्य हैं, तो वह सामने आकर स्पष्ट करे कि उसने संगठन क्यों छोड़ा और वह किस आधार पर बैंक मित्रों से जुड़ने का दावा कर रहा है।”

विजय प्रताप सिंह, प्रदेश अध्यक्ष (UP-CSPWA)

 

बैंक मित्रों में आक्रोश

​वर्तमान में बैंक मित्रों के व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर यह मामला जबरदस्त चर्चा में है। जागरूक बैंक मित्र अब उस व्यक्ति से संगठन के पंजीकरण और आर्थिक पारदर्शिता के प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।

समाज तक की अपील: सभी बैंक मित्र किसी भी संगठन से जुड़ने या धन देने से पहले उसके वैधानिक दस्तावेजों और पंजीकरण की जांच अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अपने आधिकारिक संगठन या स्थानीय प्रशासन को दें।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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