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जनपद गोरखपुर के ब्लॉक पिपराइच अंतर्गत ग्राम पंचायत बरायपुर में मनरेगा योजना के नाम पर सरकारी धन की खुली लूट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ 16 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 के बीच बड़े पैमाने पर फर्जी मजदूर दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया।

शिकायतकर्ता विजय प्रताप सिंह (स्वतंत्र पत्रकार एवं समाजसेवी) ने गारंटी के साथ दावा किया है कि यह पूरा मामला पूरी तरह सत्य, दस्तावेज़ी साक्ष्य और NMMS फोटो प्रमाणों पर आधारित है।

📸 NMMS ऐप में बड़ा फर्जीवाड़ा

मनरेगा के नियमों के अनुसार मजदूरों की दिन में दो बार फोटो लेना अनिवार्य है, लेकिन बरायपुर पंचायत में—

✔ एक ही व्यक्ति की फोटो बार-बार अलग-अलग मजदूरों के नाम पर लगाई गई।

✔ मोबाइल गैलरी की स्टोरेज फोटो का इस्तेमाल किया गया।

✔ “मोबाइल से मोबाइल फोटो” की प्रक्रिया अपनाई गई।

✔ नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए एक ही फोटो से कई मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई।

यह सीधा प्रमाण है कि यह घोटाला योजनाबद्ध तरीके से किया गया और इसमें ग्राम पंचायत स्तर से लेकर विभागीय कर्मचारियों तक की मिलीभगत की आशंका है।

📅 दिनवार फर्जी मजदूर संख्या

16 जनवरी – 64

17 जनवरी – 87

18 जनवरी – 87

19 जनवरी – 87

20 जनवरी – 87

21 जनवरी – 44

22 जनवरी – 44

23 जनवरी – 42

24 जनवरी – 42

25 जनवरी – 44

27 जनवरी – 44

28 जनवरी – 43

29 जनवरी – 41

31 जनवरी – 18

➡ कुल फर्जी मजदूर-दिवस: 774

➡ एक दिन की मजदूरी: ₹252

➡ कुल घोटाला: ₹1,95,048/-

📑 संदिग्ध मास्टर रोल

4705, 4706, 4707, 4708, 4709, 4710, 4711,

4831, 4832, 4833, 4834, 4835, 4836,

4874, 4875

📢 किन-किन जगह शिकायत की गई

इस गंभीर घोटाले की शिकायत डिजिटल माध्यम से निम्न अधिकारियों व विभागों को की गई है—

✔ मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS)

✔ भारत सरकार (ग्रामीण विकास मंत्रालय/प्रमुख सचिव स्तर)

✔ जिलाधिकारी, गोरखपुर

✔ मुख्य विकास अधिकारी (CDO), गोरखपुर

✔ जिला कार्यक्रम अधिकारी / DC मनरेगा, गोरखपुर

✔ मनरेगा लोकपाल, गोरखपुर

✔ थाना प्रभारी, पिपराइच, जनपद गोरखपुर

IGRS शिकायत संख्या: 40018826005091

🗣️ शिकायतकर्ता का बयान

शिकायतकर्ता विजय प्रताप सिंह का कहना है—

“यह घोटाला गरीब मजदूरों के हक पर सीधा डाका है। सरकार जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती है, लेकिन नीचे स्तर पर अधिकारी ही नियमों को कुचल रहे हैं। मेरी शिकायत पूरी तरह सत्य, साक्ष्य सहित और सरकारी पोर्टल से प्राप्त प्रमाणों पर आधारित है। यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती तो यह माना जाएगा कि प्रशासन भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है।”

⚠️ अब प्रशासन की परीक्षा

अब सवाल यह है कि—

क्या दोषी प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक और संबंधित अधिकारी बख्शे जाएंगे?

या फिर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत

👉 एफआईआर

👉 रिकवरी

👉 निलंबन

👉 विभागीय कार्रवाई

जैसे ठोस कदम उठाए जाएंगे?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो यह साफ संकेत होगा कि मनरेगा गरीबों की योजना नहीं बल्कि भ्रष्टाचारियों की कमाई का साधन बन चुकी है।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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