
जनपद – गोरखपुर | ब्लॉक – पिपराइच | ग्राम पंचायत – अराजी चौरी
अराजी चौरी ग्राम पंचायत में सरकारी धन की बंदरबांट का मामला सामने आया है। सरकारी पोर्टल eGramSwaraj पर दर्ज भुगतान विवरण और उससे जुड़े बिल–वाउचर देखकर साफ पता चलता है कि पंचायत में नियम-कानून को ताक पर रखकर भुगतान किया जा रहा है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार दिनांक 04 अगस्त 2025 को पंचायत खाते से
➡ ₹69,930 का भुगतान
➡ “फॉगिंग मशीन क्रय कार्य” के नाम पर
➡ फर्म – V.K. Associate, गोरखपुर को किया गया।
लेकिन जब इससे जुड़ा बिल देखा गया तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।
बिल में – ❌ GST नंबर नहीं है
❌ बिल की वैध तिथि स्पष्ट नहीं
❌ माल आपूर्ति का कोई प्रमाण नहीं
❌ मापन पुस्तिका (MB) संलग्न नहीं
❌ पंचायत स्टॉक रजिस्टर में एंट्री का कोई उल्लेख नहीं
यानी कागज पर मशीन खरीदी गई, लेकिन मौके पर उसका कोई ठोस प्रमाण नहीं।
₹6000 का एक और संदिग्ध भुगतान
इसी पंचायत से ₹6000 का भुगतान “मानदेय/मजदूरी” के नाम पर किया गया है, लेकिन इसमें भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि
✔ कौन काम किया
✔ कितने दिन किया
✔ किस आदेश से भुगतान हुआ
यह पैसा किस आधार पर निकाला गया, इसका कोई ठोस दस्तावेज मौजूद नहीं है।
सरकारी रिकॉर्ड ही खोल रहा पोल
यह कोई मनगढ़ंत आरोप नहीं है।
यह वही तथ्य हैं जो सरकारी वेबसाइट पर अपडेट किए गए हैं।
यानी भ्रष्टाचार का शक किसी अफवाह से नहीं, बल्कि सरकारी पोर्टल के रिकॉर्ड से पैदा हुआ है।
बड़ा सवाल
👉 बिना GST वाले बिल पर भुगतान कैसे?
👉 बिना माल प्राप्ति प्रमाण के पैसा क्यों?
👉 किसकी अनुमति से ये भुगतान हुए?
👉 पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान ने आंख मूंदकर साइन क्यों किए?
अगर यही काम किसी आम नागरिक ने किया होता तो अब तक एफआईआर दर्ज हो चुकी होती।
जनता में आक्रोश
ग्राम पंचायत अराजी चौरी के ग्रामीणों में इस खुली लूट को लेकर भारी नाराज़गी है। लोगों का कहना है कि
“सड़क, नाली और पानी के काम अधूरे हैं, लेकिन कागजों में पैसा पूरा निकाल लिया जा रहा है।”
जांच की मांग
इस पूरे मामले में
🔹 जिलाधिकारी गोरखपुर
🔹 मुख्य विकास अधिकारी
🔹 पंचायती राज विभाग
🔹 वित्त विभाग
से मांग की जाती है कि अराजी चौरी पंचायत के
✔ सभी बिल
✔ सभी भुगतान
✔ सभी वाउचर
✔ और संबंधित अधिकारियों की भूमिका
की विशेष जांच कराई जाए।
यदि दोष सिद्ध होता है तो ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और भुगतान से जुड़े कर्मचारियों पर
➡ रिकवरी
➡ एफआईआर
➡ और विभागीय कार्रवाई
तुरंत होनी चाहिए।

