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मनरेगा भ्रष्टाचार पर वार बना साजिश का कारण: पिपराइच की पंचायतों में लूट उजागर, मीडिया को बदनाम करने की कोशिश बेनकाब”
📰 खबर
समाज तक डिजिटल मीडिया द्वारा ग्राम पंचायतों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर की जा रही निरंतर डिजिटल पड़ताल के बाद सामने आए घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सरकारी योजनाओं की सच्चाई उजागर होती है, तब कुछ लोग जवाबदेही स्वीकार करने के बजाय खबर दबाने और मीडिया को बदनाम करने की साजिश का सहारा लेते हैं।
समाज तक डिजिटल मीडिया विगत लंबे समय से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों— गोरखपुर, सुल्तानपुर, अयोध्या, चित्रकूट, मैनपुरी, गाजीपुर, अमेठी, उन्नाव, जौनपुर, रायबरेली, आजमगढ़ सहित अनेक जिलों में ग्राम पंचायतों से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रहा है। इन मामलों में प्रकाशित खबरों के साथ-साथ पूरे दस्तावेज़ी साक्ष्य एवं डिजिटल प्रमाणों के साथ प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें भी की गई हैं, ताकि शासन-प्रशासन तक वास्तविक स्थिति पहुंचे और कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
 स्टेप-बाय-स्टेप दर्ज की गई शिकायतें (IGRS)
1️⃣ ग्राम पंचायत अराजी चौरी – प्रथम शिकायत
मनरेगा व अन्य मदों में अनियमितताओं को लेकर
IGRS संख्या: 40018825067214
➡️ यह शिकायत पूरे साक्ष्य के साथ दर्ज कराई गई थी।
➡️ शिकायत के बाद संबंधित स्तर पर असंतोष व दबाव की गतिविधियां सामने आने लगीं।
2️⃣ ग्राम पंचायत मठिया – प्रथम शिकायत
मनरेगा में भ्रष्टाचार को लेकर
IGRS संख्या: 40018825065614
➡️ इसमें भी फर्जी कार्य, कागजी भुगतान व सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े बिंदु शामिल किए गए।
3️⃣ थाना पिपराइच स्तर पर शिकायत (FIR व जांच हेतु)
अराजी चौरी व मठिया पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर
IGRS संख्या: 40018826003492
➡️ यह शिकायत विशेष रूप से एफआईआर दर्ज कराने और कठोर कार्रवाई कराने के उद्देश्य से की गई।
➡️ शिकायत में बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और प्रकाशित खबरों के प्रमाण संलग्न किए गए।
4️⃣ ग्राम पंचायत अराजी चौरी – मनरेगा भ्रष्टाचार
IGRS संख्या: 40018826003862
➡️ यह शिकायत मनरेगा योजना में हजारों रुपये के दुरुपयोग, फर्जी उपस्थिति और नियमों की अनदेखी से संबंधित है।
➡️ शिकायत पूर्ण साक्ष्य के साथ दर्ज की गई है।
5️⃣ ग्राम पंचायत मठिया – मनरेगा भ्रष्टाचार
IGRS संख्या: 40018826004281
➡️ इसमें मनरेगा के नाम पर सरकारी धन की लूट, कागजों में कार्य दिखाकर भुगतान कराने और जवाबदेही से बचने जैसे आरोप शामिल हैं।
इन सभी शिकायतों में एक समान बात स्पष्ट की गई है कि सरकारी धन की हजारों रुपये की धनराशि नियमों के विरुद्ध खर्च की गई, जिसकी पुष्टि के लिए दस्तावेज़, स्क्रीनशॉट, मास्टर रोल, फोटो व अन्य साक्ष्य संलग्न किए गए हैं।
🧾 स्पष्टीकरण
शिकायतकर्ता का स्पष्ट कहना है कि:
➡️ ये शिकायतें किसी व्यक्तिगत द्वेष के कारण नहीं
➡️ बल्कि जनहित और सरकारी धन की रक्षा के उद्देश्य से
➡️ पूरे प्रमाण और तथ्यों के आधार पर
➡️ प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत दर्ज कराई गई हैं
शिकायतकर्ता के अनुसार, यह शिकायतें गारंटी के साथ सत्यापन योग्य हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
जब इन शिकायतों के आधार पर खबरें प्रकाशित की गईं, तब समाचार को हटवाने, वीडियो डिलीट कराने और “समझौता” कराने जैसे प्रयास सामने आए। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि उद्देश्य सुधार नहीं बल्कि सच्चाई को दबाकर मीडिया की स्वच्छ छवि को खराब करना है।
समाज तक डिजिटल मीडिया की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि
मामले से जुड़े सभी IGRS नंबर, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड एवं दस्तावेज़ समाज तक डिजिटल पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से अपडेट किए जा रहे हैं, ताकि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आ सके और किसी प्रकार का भ्रम न फैलाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार उजागर होता है, तब दोषी तत्व षड्यंत्र का नया अध्याय लिखते हैं, जिसमें पत्रकारिता को निशाना बनाया जाता है।
यह मामला किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं बल्कि:
✔️ प्रेस की स्वतंत्रता
✔️ जनहित
✔️ सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता
से जुड़ा हुआ है।
जो लोग सरकार की मंशा के विपरीत जाकर मनरेगा को लूट का माध्यम बना रहे हैं और जब उनकी सच्चाई सामने आती है तो सौदेबाज़ी व दबाव का रास्ता अपनाते हैं, वे न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि भारत सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अब यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस पूरे प्रकरण को सामान्य विवाद मानकर न छोड़े, बल्कि इसे जनहित से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए निष्पक्ष जांच कराए, ताकि:
✔️ दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो
✔️ मनरेगा जैसी योजनाओं की पवित्रता बनी रहे
✔️ मीडिया को बदनाम करने की साजिशों पर रोक लगे
✔️ ज़ीरो टॉलरेंस नीति जमीन पर उतरे
यह प्रकरण बताता है कि जब भ्रष्टाचार उजागर होता है, तब षड्यंत्र जन्म लेता है, लेकिन सच्चाई अंततः दस्तावेज़ों और जांच के माध्यम से सामने आती है।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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