
गोरखपुर जनपद के पिपराइच ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मठिया में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। समाज तक डिजिटल मीडिया द्वारा की गई डिजिटल पड़ताल में यह उजागर हुआ कि यहां एनएमएमएस ऐप के माध्यम से नियमों को ताक पर रखकर फर्जी मजदूर दिखाए गए और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
पड़ताल के अनुसार 12 जनवरी 2026 से 27 जनवरी 2026 के बीच ग्राम पंचायत मठिया में रोजाना बड़ी संख्या में मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई। नियमों के अनुसार कार्यस्थल पर एक ही मजदूर का दो बार फोटो लेना अनिवार्य है, लेकिन यहां नाम किसी और का और फोटो किसी और का अपलोड कर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई। कई मामलों में स्टोरेज फोटो और डुप्लीकेट फोटो का प्रयोग किए जाने के प्रमाण सामने आए हैं।
दिनवार आंकड़ों के अनुसार
12 जनवरी को 113,
13 जनवरी को 113,
14 जनवरी को 115,
15 जनवरी को 69,
16 जनवरी को 68,
17 जनवरी को 40,
18 जनवरी को 40,
19 जनवरी को 84,
20 जनवरी को 81,
21 जनवरी को 75,
22 जनवरी को 75,
23 जनवरी को 72,
24 जनवरी को 72,
25 जनवरी को 71,
और 27 जनवरी को 70 मजदूर फर्जी रूप से कार्यरत दर्शाए गए।
इन सभी तिथियों को जोड़ने पर कुल 1158 मजदूर-दिवस फर्जी रूप से दर्शाए गए। मनरेगा की निर्धारित मजदूरी दर ₹252 प्रतिदिन के अनुसार करीब ₹2,91,816 रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है।
समाज तक डिजिटल मीडिया के संपादक एवं स्वतंत्र पत्रकार विजय प्रताप सिंह ने इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत संख्या 40018826004281 जारी की गई है। शिकायत में संबंधित मास्टर रोल संख्या 4625, 4626, 4627, 4628, 4629, 4630, 4647, 4648, 4649, 4650, 4651, 4652, 4653, 4826, 4827, 4828, 4829, 4856, 4857, 4858, 4859 और 4860 का उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि एनएमएमएस ऐप भारत सरकार द्वारा पारदर्शिता के उद्देश्य से लागू किया गया है, लेकिन ग्राम पंचायत मठिया में इसे भ्रष्टाचार का जरिया बना दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और फर्जी भुगतान की गई राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठने लगा है कि जब सभी फोटो और मास्टर रोल भारत सरकार की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस गड़बड़ी पर क्यों नहीं पड़ी। इससे ब्लॉक स्तर पर निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल, शिकायत दर्ज होने के बाद अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि यह मामला सिर्फ फाइलों में सिमटता है या वास्तव में दोषियों पर कार्यवाही होती है।

