गोरखपुर बना मनरेगा घोटाले का अड्डा?
पिपराइच ब्लॉक के ग्राम पंचायत बरौली में फर्जी फोटो से चल रहा “डिजिटल लूट तंत्र”गोरखपुर बना मनरेगा घोटाले का अड्डा?
पिपराइच ब्लॉक के ग्राम पंचायत बरौली में फर्जी फोटो से चल रहा “डिजिटल लूट तंत्र”
गोरखपुर (पिपराइच):
जहाँ सरकार पारदर्शिता की बात कर रही है, वहीं गोरखपुर जनपद में मनरेगा को “डिजिटल लूट योजना” में तब्दील कर दिया गया है। ब्लॉक पिपराइच के ग्राम पंचायत बरौली में मनरेगा कार्यों में जिस तरह से फर्जीवाड़ा सामने आया है, वह सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
स्वतंत्र पत्रकार विजय प्रताप सिंह की डिजिटल पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है कि मनरेगा में उपस्थिति दर्ज करने के लिए बनाए गए एनएमएमएस ऐप का इस्तेमाल पारदर्शिता के लिए नहीं, बल्कि फर्जी फोटो अपलोड करने के लिए किया जा रहा है।
जांच में पाया गया कि –

मौके की फोटो की जगह मोबाइल स्टोरेज की पुरानी फोटो अपलोड की गई।
एक ही फोटो को कई श्रमिकों के नाम पर चढ़ाया गया।
पुरुष के नाम पर महिला की फोटो और महिला के नाम पर पुरुष की फोटो दर्ज की गई।
यानि मजदूर मैदान में नहीं, लेकिन फोटो हाजिरी में मौजूद हैं।
पूरी तरह संदिग्ध मास्टर रोल:
4878, 4879, 4881, 4882, 4701, 4702
इन मास्टर रोलों में दर्ज उपस्थिति प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होती है, इसके बावजूद भुगतान पास होना यह दर्शाता है कि यह खेल केवल पंचायत स्तर पर नहीं, बल्कि ऊपर तक की मिलीभगत से चल रहा है।
“शिकायतों पर भी सन्नाटा”
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे प्रकरण की शिकायत
➡ जिलाधिकारी गोरखपुर
➡ मुख्य विकास अधिकारी (CDO) गोरखपुर
➡ मनरेगा लोकपाल
➡ प्रमुख सचिव (ग्रामीण विकास)
➡ भारत सरकार के संबंधित विभाग
को डिजिटल माध्यम से साक्ष्यों सहित भेजी जा चुकी है, फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
लोगों में चर्चा है कि यदि यही स्थिति रही तो मनरेगा को लोग अब “रोजगार गारंटी योजना” नहीं, बल्कि “फोटो गारंटी योजना” कहने लगेंगे।
मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश?
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के गृह जनपद गोरखपुर में इस स्तर का भ्रष्टाचार होना न केवल चिंता का विषय है, बल्कि उनकी ईमानदार छवि को धूमिल करने का प्रयास भी माना जा रहा है।
प्रश्न यह है कि –
जब शिकायतें अधिकारियों तक पहुँच चुकी हैं,
तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
क्या भ्रष्टाचारियों को खुली छूट दे दी गई है?
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर
स्वतंत्र पत्रकार विजय प्रताप सिंह का कहना है कि यह शिकायत जनहित में की गई है और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को लूट से बचाना है।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन जल्द जांच कराकर
✔ दोषियों पर एफआईआर दर्ज करेगा
✔ गलत भुगतान की वसूली करेगा
✔ और ऐसे “डिजिटल लुटेरों” पर कठोर कार्रवाई करेगा
अब देखना यह है कि गोरखपुर प्रशासन इस खबर को गंभीरता से लेता है या फिर मनरेगा की फाइलों में यह मामला भी दबा दिया जाएगा।
रिपोर्ट – विजय प्रताप सिंह
समाज तक डिजिटल मीडिया

