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गोरखपुर।

जनपद गोरखपुर के ब्लॉक पिपराइच अंतर्गत ग्राम पंचायत राउतपार में मनरेगा योजना के तहत 9 जनवरी 2026 से 22 जनवरी 2026 के बीच बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। डिजिटल निगरानी के नाम पर लागू की गई एनएमएमएस (NMMS) प्रणाली यहां भ्रष्टाचार का नया जरिया बनती नजर आ रही है।

नियमों के मुताबिक मनरेगा मजदूरों की कार्य शुरू और कार्य समाप्ति के समय दो बार फोटो लेना अनिवार्य है, और फोटो उसी मजदूर की होनी चाहिए जिसका नाम मास्टर रोल में दर्ज हो। लेकिन राउतपार पंचायत में इन नियमों को खुलेआम तोड़ा गया।

महिला के नाम पर पुरुष, पुरुष के नाम पर महिला की फोटो

डिजिटल पड़ताल में सामने आया है कि

महिला मजदूर के नाम पर पुरुष की फोटो अपलोड की गई

पुरुष मजदूर के नाम पर महिला की फोटो लगाई गई

एक ही फोटो को बार-बार इस्तेमाल किया गया

दो बार फोटो की जगह केवल एक स्टोरेज फोटो अपलोड हुई

एक ही मोबाइल से कई मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर दी गई

यानी सरकार को भेजा गया एनएमएमएस डाटा पूरी तरह फर्जी है, और उसी के आधार पर भुगतान भी जारी कर दिया गया।

834 मजदूरों के नाम पर करीब 2.10 लाख रुपये का खेल

संदिग्ध मास्टर रोल संख्या

4668, 4669, 4670, 4671, 4672, 4673, 4685, 4686

के अंतर्गत लगभग 834 मजदूरों की उपस्थिति दिखाई गई है।

मनरेगा की दैनिक मजदूरी 252 रुपये के हिसाब से देखें तो यह मामला एक दिन में ही करीब 2.10 लाख रुपये से अधिक के संभावित फर्जी भुगतान की ओर इशारा करता है। यह राशि सीधे-सीधे गरीब मजदूरों के हक पर डाका मानी जा रही है।

जीरो टॉलरेंस की नीति पर उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद में हो रहा है। सरकार जहां जीरो टॉलरेंस की बात करती है, वहीं ब्लॉक स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी—BDO, APO और संबंधित कर्मचारी—या तो आंख मूंदे बैठे हैं या फिर यह सब उनकी जानकारी के बिना संभव नहीं।

डिजिटल साक्ष्य के साथ शिकायत

इस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता विजय प्रताप सिंह (जनपद रायबरेली) ने संबंधित विभागों को शिकायती पत्र भेजते हुए कहा है कि एनएमएमएस में भेजा गया डाटा 100 प्रतिशत फर्जी है और इसके डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं।

शिकायत में मांग की गई है कि

सभी संदिग्ध मास्टर रोल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज हो

फर्जी भुगतान की रिकवरी कराई जाए

अब देखने वाली बात यह है कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति इस मामले में कागजों तक सीमित रहती है या जमीन पर कार्रवाई होती है।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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