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गोरखपुर: पिपराइच पुलिस की विवादित रिपोर्ट, गंभीर शिकायतों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से किया गया निस्तारण
गोरखपुर। जनपद गोरखपुर के थाना पिपराइच क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत अराजी चौरी से जुड़ा एक मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पंचायत से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और संदिग्ध लेन-देन को लेकर जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) के माध्यम से विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई थी।
शिकायत में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं के साथ धमकी भरे पत्र और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरे मामले में पंचायत से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग की गई थी, लेकिन जांच के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई।
बैंक खाता फ्रीज, मोबाइल नंबर बंद
मामले से जुड़े एक बैंक खाते को साइबर सेल पुलिस की प्रक्रिया के माध्यम से बैंक द्वारा फ्रीज कराया गया, साथ ही संबंधित मोबाइल नंबर को भी बंद कराया गया। इससे यह साफ होता है कि मामला गंभीर था और प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई भी हुई।
एक महीने बाद रिपोर्ट, लेकिन सवालों से बचाव
जनवरी 2026 में दर्ज शिकायत पर करीब एक महीने बाद 7 मार्च 2026 को पिपराइच पुलिस द्वारा रिपोर्ट लगाई गई। लेकिन रिपोर्ट में शिकायत में उठाए गए कई गंभीर बिंदुओं और धमकी से जुड़े तथ्यों पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
रिपोर्ट में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि यह मामला जिलाधिकारी या अन्य विभागों से संबंधित है, इसलिए शिकायतकर्ता वहां संपर्क करें।
पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब मामला पुलिस के संज्ञान में था और खाता फ्रीज कराने जैसी कार्रवाई भी हुई, तो फिर जांच रिपोर्ट में शिकायत के मुख्य बिंदुओं को नजरअंदाज कर जल्दबाजी में निस्तारण क्यों किया गया?
आरोप है कि एक पक्ष पर कार्रवाई करना पुलिस को उचित लगा, जबकि दूसरे पक्ष से जुड़े गंभीर आरोपों पर कोई ठोस जांच नहीं की गई।
निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर चर्चा को जन्म दे दिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह मामला सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निस्तारण इसी तरह औपचारिकता निभाकर कर दिया जाएगा?
फिलहाल पूरे मामले को लेकर लोगों की निगाहें अब प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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