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जनपद गोरखपुर के पिपराइच ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मठिया में सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला अब बिल-वाउचरों के जरिए सामने आ रहा है। XV वित्त आयोग (टाइड ग्रांट) की राशि से किए गए कार्यों के नाम पर जो भुगतान दर्शाया गया है, वह कागज़ों में तो मौजूद है, लेकिन ज़मीन पर उसका असर दिखाई नहीं देता।

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड विवरण के अनुसार पंचायत में एक ही महीने में अलग-अलग मदों में दो भुगतान किए गए हैं, जिनका आधार वही बिल-वाउचर हैं जिनकी वैधता पर अब सवाल उठ रहे हैं।

🔴 पहला भुगतान वाउचर (Voucher No. XVFC/2025-26/P/18)

कार्य का नाम:

सेग्रीगेशन यूनिट का निर्माण/रखरखाव

राशि: ₹1,39,980

भुगतान प्राप्तकर्ता: NIKKI TREDERS

दावा:

कूड़ा निस्तारण के लिए सेग्रीगेशन यूनिट से जुड़ा कार्य

हकीकत:

– अपलोड बिल पर न स्पष्ट मोहर

– न विधिवत हस्ताक्षर

– न सामग्री की सूची

– न कार्यस्थल की तस्वीर

यानी काम का ठोस प्रमाण नहीं, फिर भी पूरा भुगतान।

🔴 दूसरा भुगतान वाउचर (Voucher No. XVFC/2025-26/P/20)

कार्य का नाम:

पेयजल पाइप मरम्मत

राशि: ₹74,860

भुगतान प्राप्तकर्ता: NIKKI TREDERS

दावा:

पानी की पाइपलाइन की मरम्मत

हकीकत:

– वही स्थिति: साधारण कागज़

– न फर्म की मोहर

– न हस्ताक्षर

– न मरम्मत स्थल का कोई रिकॉर्ड

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस मरम्मत की बात कही जा रही है, उसका कोई बड़ा कार्य गांव में दिखाई नहीं देता।

🧾 नियमों के खिलाफ भुगतान

सरकारी नियमों के अनुसार हर भुगतान के साथ:

✔️ पक्का बिल

✔️ विक्रेता की मोहर

✔️ हस्ताक्षर

✔️ मापन पुस्तिका (MB)

✔️ कार्य स्थल की फोटो

अनिवार्य है।

लेकिन मठिया पंचायत के दोनों वाउचरों में ये शर्तें पूरी नहीं होती दिख रहीं।

❓ प्रधान और पंचायत सचिव की भूमिका पर सवाल

इन दोनों भुगतानों की फाइल ग्राम पंचायत से होकर गुज़री। बिना पंचायत सचिव की संस्तुति और प्रधान की सहमति के यह संभव नहीं।

सवाल यह है कि —

क्या बिना जांचे भुगतान पास कर दिया गया?

या फिर पूरा खेल आपसी सांठगांठ से खेला गया?

❓ ब्लॉक कार्यालय की चुप्पी

पिपराइच ब्लॉक कार्यालय से अनुमोदन के बाद ही पैसा जारी हुआ।

फिर यह फर्जीवाड़ा कैसे मंजूर हो गया?

क्या तकनीकी और वित्तीय परीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया?

⚠️ विकास नहीं, केवल भुगतान

यह पैसा सफाई, कूड़ा निस्तारण और पेयजल व्यवस्था के लिए था।

लेकिन गांव में न नई व्यवस्था दिख रही है, न कोई बड़ा सुधार।

दिख रहा है तो सिर्फ —

कागज़ी बिल

और बैंक खाते में गया पैसा।

🚨 उच्च स्तरीय जांच की मांग

समाज तक डिजिटल मीडिया की मांग है कि:

– दोनों बिल-वाउचरों की अलग-अलग जांच हो

– कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए

– सामग्री खरीद की पुष्टि की जाए

– प्रधान व पंचायत सचिव से जवाब लिया जाए

– दोषी पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज हो

– सरकारी धन की रिकवरी हो

🏛️ प्रशासन और पुलिस से अपेक्षा

यह मामला अब केवल पंचायत का नहीं रहा।

यह प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

यदि इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संदेश जाएगा कि पंचायत स्तर पर कागज़ी विकास को खुली छूट मिली हुई है।

अब देखना यह है कि थाना पिपराइच और जिला प्रशासन इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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