
जनपद गोरखपुर के सहजनवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत रेवड़ा में मनरेगा योजना को खुली लूट का जरिया बना दिया गया है।
14 जनवरी से 16 जनवरी 2026 तक समाज तक डिजिटल पोर्टल की डिजिटल पड़ताल में जो सामने आया, उसने एनएमएमएस सिस्टम की पोल खोल दी।
कागजों में मजदूर काम कर रहे हैं, मोबाइल ऐप पर फोटो चढ़ रहे हैं, भुगतान की तैयारी है…
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह रही कि
👉 न मजदूर मिले
👉 न काम दिखा
👉 सिर्फ हाजिरी और एंट्री चलती रही
📆 तीन दिन, एक जैसा खेल
14 जनवरी 2026 – 55 मजदूर दिखाए गए
15 जनवरी 2026 – फिर 55 मजदूर
16 जनवरी 2026 – 56 मजदूर
यानि कुल 166 मजदूर सिर्फ मोबाइल और कागजों में काम करते रहे।
📑 जिन मास्टर रोलों पर खेल हुआ
इस पूरे फर्जीवाड़े में जिन मास्टर रोलों का इस्तेमाल किया गया—
5482, 5483, 5484, 5487, 5488, 5489
यही नंबर सरकारी धन निकालने का औजार बने।
📲 एनएमएमएस सिस्टम की खुलेआम बेइज्जती
NMMS ऐप इसलिए बनाया गया था कि
✔ मजदूर असली हो
✔ फोटो उसी वक्त ली जाए
✔ लोकेशन सही हो
रेवड़ा पंचायत में हालात उलटे मिले—
❌ मजदूर मौके पर नहीं
❌ फोटो पहले से सेव
❌ लोकेशन संदिग्ध
❌ समय मनमाना
मतलब साफ है—
सिस्टम को चकमा देने की पूरी स्क्रिप्ट पहले से लिखी गई थी।
❓ सवाल जो फाइलों में नहीं दबेंगे
▪ पैसा किसके खाते में गया?
▪ फोटो किसने अपलोड किए?
▪ पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक की भूमिका क्या रही?
▪ क्या यह बिना मिलीभगत संभव है?
यह मामला साधारण गलती का नहीं, बल्कि योजनाबद्ध सरकारी धन की लूट की ओर इशारा करता है।
⚖️ जीरो टॉलरेंस सिर्फ पोस्टर तक?
सरकार “जीरो टॉलरेंस” की बात करती है,
लेकिन रेवड़ा पंचायत में
➡ टॉलरेंस दिख रहा है
➡ कार्रवाई गायब है
अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठे, तो साफ माना जाएगा कि
मनरेगा अब गरीबों की नहीं, दलालों की योजना बन चुकी है।
📢 शिकायत दर्ज, सबको भेजा गया
इस पूरे प्रकरण पर IGRS शिकायत संख्या 40018826004463 दर्ज कराई जा चुकी है।
शिकायत की प्रति—
➡ जिलाधिकारी, गोरखपुर
➡ मनरेगा लोकपाल, गोरखपुर
➡ भारत सरकार के संबंधित विभाग
➡ उत्तर प्रदेश सरकार
को भेजी जा चुकी है।
डिजिटल साक्ष्य भी संबंधित अधिकारियों को सौंपे जा रहे हैं।
अब सवाल सिर्फ एक है—
👉 कार्रवाई होगी
या
👉 घोटाले पर पर्दा डाला जाएगा?
क्योंकि यह सिर्फ एक पंचायत का मामला नहीं,
यह पूरी मनरेगा व्यवस्था की सच्चाई है।

