
जनपद गोरखपुर के ब्लॉक पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत कुअबर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लागू एनएमएमएस (NMMS) एप में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति के बजाय मोबाइल स्टोरेज में मौजूद पुराने फोटो का उपयोग कर फर्जी तरीके से हाजिरी दर्ज की गई और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक ही फोटो को कई मजदूरों के नाम से जोड़कर उपस्थिति बनाई गई। कहीं पुरुष मजदूर की फोटो महिला मजदूर के नाम से तो कहीं महिला मजदूर की फोटो पुरुष मजदूर के नाम से अपलोड की गई। इस तरीके से वास्तविक मजदूरों को काम पर बुलाए बिना केवल एप और कागजों में मजदूरी दिखाकर भुगतान निकाला गया।
दिनांकवार फर्जी मजदूर दिखाने का आरोप
शिकायत के अनुसार,
28 जनवरी 2026 को 89 मजदूर (9 मास्टर रोल),
29 जनवरी को 88 मजदूर (9 मास्टर रोल),
30 जनवरी को 88 मजदूर (9 मास्टर रोल),
31 जनवरी को 87 मजदूर (9 मास्टर रोल),
1 फरवरी को 86 मजदूर (9 मास्टर रोल),
2 फरवरी को 85 मजदूर (9 मास्टर रोल),
3 फरवरी को 86 मजदूर (9 मास्टर रोल),
4 फरवरी को 86 मजदूर (9 मास्टर रोल),
5 फरवरी को 86 मजदूर (9 मास्टर रोल),
6 फरवरी को 84 मजदूर (9 मास्टर रोल),
7 फरवरी को 84 मजदूर (9 मास्टर रोल),
8 फरवरी को 81 मजदूर (9 मास्टर रोल) तथा
9 फरवरी 2026 को 10 मजदूर (1 मास्टर रोल) दिखाए गए।
इन सभी दिनों में कुल 1040 फर्जी मजदूर दर्शाए जाने का आरोप है। मनरेगा में एक दिन की मजदूरी ₹252 के हिसाब से कुल लगभग ₹2,62,080 की धनराशि फर्जी तरीके से निकाले जाने की आशंका जताई गई है।
मुख्यमंत्री पोर्टल व ग्राम विकास विभाग में दर्ज शिकायत
इस पूरे मामले को लेकर जनपद रायबरेली निवासी विजय प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के साथ-साथ ग्राम विकास विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है।
ग्राम विकास विभाग को की गई शिकायत की जारी संख्या – 40018826006475 बताई गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह फर्जीवाड़ा ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक एवं तकनीकी सहायक की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि एनएमएमएस एप भारत सरकार द्वारा मजदूरों की उपस्थिति में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई व्यवस्था है, लेकिन यहां उसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर गरीब मजदूरों के अधिकारों पर डाका डाला गया है।
क्या कहते हैं नियम
मनरेगा नियमों के अनुसार, मजदूरों की उपस्थिति वास्तविक कार्यस्थल पर फोटो के माध्यम से दर्ज की जाती है। फर्जी उपस्थिति दर्ज करना न केवल प्रशासनिक अनियमितता है बल्कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध भी है।
जांच व कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित अवधि के सभी मास्टर रोल, एनएमएमएस फोटो एवं भुगतान विवरण की जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही फर्जी तरीके से निकाली गई धनराशि की वसूली कर सरकारी खाते में जमा कराई जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेता है और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।

