
खेल के मैदान में हुए विवाद को लेकर सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से मामला साधारण झगड़े से अलग नजर आ रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना के समय कोई मारपीट नहीं हो रही थी, केवल मौखिक बहस चल रही थी। इसी दौरान एक युवक मोबाइल कैमरा चालू कर बार-बार खिलाड़ियों को उकसाते हुए सुनाई देता है –
“कौन मारना चाहता है, मार के दिखाओ”,
“क्या झगड़ा करोगे, क्या विवाद करोगे।”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि उक्त युवक मौके पर आकर यह उकसावे वाली बातें न करता और वीडियो रिकॉर्ड न करता, तो स्थिति शांत ही रहती। इसी उकसावे के बाद माहौल बिगड़ा और विवाद ने झगड़े का रूप ले लिया।
सबसे अहम बात यह है कि वायरल वीडियो के अंत में रिकॉर्ड करने वाला युवक खुद यह कहते हुए सुनाई देता है –
“चलो अब काम हो गया, वीडियो बन गया।”
इस कथन से यह संदेह और गहरा गया है कि विवाद अचानक नहीं हुआ, बल्कि जानबूझकर माहौल बिगाड़कर वीडियो बनाया गया, ताकि बाद में कानूनी कार्रवाई कराई जा सके।
कानून क्या कहता है
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 107 के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए उकसाता है या भड़काता है, तो उसे अपराध का भागीदार माना जाता है। इसी तरह धारा 120B आपराधिक साजिश से जुड़ी है, जिसमें पहले से योजना बनाकर किसी घटना को अंजाम देना अपराध की श्रेणी में आता है।
कानून के जानकारों का कहना है कि यदि यह साबित होता है कि विवाद को जानबूझकर उकसाया गया और उसका वीडियो बनाकर मुकदमा दर्ज कराने की मंशा थी, तो यह साजिश की श्रेणी में आएगा।
SC/ST एक्ट के दुरुपयोग का सवाल
घटना के बाद विवाद को लेकर SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि यह कानून पीड़ितों की सुरक्षा के लिए है, न कि निजी रंजिश या साजिश में इस्तेमाल के लिए। यदि प्रथम दृष्टया यह पाया जाता है कि मामला झूठा या पूर्व नियोजित है, तो अदालत आरोपी को राहत दे सकती है और झूठी शिकायत करने वाले के विरुद्ध IPC की धारा 182 और 211 के तहत कार्रवाई भी संभव है।
असली वजह क्या बनी
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उकसाने वाला युवक बीच में न आता और बार-बार चुनौती न देता, तो विवाद नहीं होता। इसलिए पूरे मामले की जड़ वही उकसावे वाली कार्रवाई मानी जा रही है।
निष्कर्ष
मौजूदा तथ्यों और वीडियो में रिकॉर्ड कथनों से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि विवाद सामान्य खेल के दौरान अचानक नहीं हुआ, बल्कि उकसावे और साजिश के तहत कराया गया। अब देखना यह है कि जांच में पुलिस इन बिंदुओं को कितना गंभीरता से लेती है और वीडियो में दर्ज संवादों को सबूत के तौर पर किस प्रकार आंकती है।

