नकली छेना मामले में खाद्य विभाग पर मंडल कार्यालय सख्त! रायबरेली के अधिकारी मानिक चन्द्र सिंह से मांगा स्पष्टीकरण
कोरिहर गांव में कथित नकली छेना प्रकरण पर लखनऊ मंडल कार्यालय ने लिया संज्ञान, पत्रकार विजय प्रताप सिंह की शिकायत और सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों का पत्र में उल्लेख
रायबरेली। गुरुबक्शगंज थाना क्षेत्र के कोरिहर गांव में कथित रूप से नकली छेना तैयार किए जाने के मामले में अब खाद्य सुरक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया है। मामले को लेकर कार्यालय खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ मंडल, लखनऊ की ओर से रायबरेली के सहायक आयुक्त (खाद्य) ग्रेड-II/अभिहित अधिकारी मानिक चन्द्र सिंह से बाकायदा स्पष्टीकरण मांगा गया है।
7 सितंबर 2026 को जारी पत्र संख्या 1389909/2026 में शिकायतकर्ता श्री विजय प्रताप सिंह, पत्रकार एवं डायरेक्टर, समाज तक फाउंडेशन, ग्राम पिपरी, थाना गुरुबक्शगंज, जनपद रायबरेली द्वारा भेजे गए शिकायती पत्र तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
पत्र में क्या लिखा है, यह बना सबसे अहम सवाल
लखनऊ मंडल कार्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि शिकायतकर्ता श्री विजय प्रताप सिंह द्वारा अपने मोबाइल नंबर से दिनांक 03.09.2026 एवं दिनांक रहित शिकायती पत्र तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित “नकारात्मक खबरों” के संबंध में मामला कार्यालय के संज्ञान में आया।
पत्र में आगे संबंधित प्रकरण के संबंध में साक्ष्य सहित आख्या संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी से प्राप्त कर अधोहस्ताक्षरी कार्यालय को दिनांक 10.09.2026 तक प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यानी मामला अब महज स्थानीय शिकायत या सोशल मीडिया की खबर तक सीमित नहीं रहा। लखनऊ मंडल स्तर से रायबरेली के जिम्मेदार अधिकारी से जवाब मांगा जाना इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को दर्शाता है।
खाद्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
कोरिहर गांव में कथित नकली छेना बनाए जाने के आरोपों को लेकर पहले से ही खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। शिकायतकर्ता विजय प्रताप सिंह लगातार मामले को उठाते रहे हैं।
अब जब लखनऊ मंडल कार्यालय ने स्वयं पत्र जारी कर रायबरेली के सहायक आयुक्त (खाद्य) ग्रेड-II/अभिहित अधिकारी मानिक चन्द्र सिंह से स्पष्टीकरण मांगा है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर स्थानीय स्तर पर पूरे मामले में क्या कार्रवाई की गई?
यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो कारोबारी के साथ-साथ विभागीय स्तर पर लापरवाही की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
क्या खाद्य माफिया को संरक्षण मिला? जांच में सामने आएगा सच
पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ता की ओर से खाद्य माफिया को संरक्षण दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है।
लेकिन अब मंडल कार्यालय के पत्र ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। 10 सितंबर 2026 तक मांगी गई आख्या और स्पष्टीकरण के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में अब सवाल सिर्फ नकली छेना बनाने वालों पर कार्रवाई का नहीं, बल्कि यह भी है कि शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर पूरी प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी रही।
अब नजर 10 सितंबर पर
लखनऊ मंडल कार्यालय के निर्देश के बाद अब 10 सितंबर 2026 महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। इस तारीख तक मांगी गई रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और मानिक चन्द्र सिंह की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
समाज तक न्यूज़ का सवाल साफ है—यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल चल रहा था तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी और यदि शिकायत गलत थी तो इसकी सच्चाई जनता के सामने कब आएगी?
पत्र में उल्लिखित तथ्यों को आधिकारिक दस्तावेज के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अंतिम अधिकार सक्षम जां
च/प्राधिकारी को है।

