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समाज तक फाउंडेशन की पहल: एकौनी में नशे के खिलाफ हजारों ग्रामीणों की हुंकार, विजय प्रताप सिंह ने लिया नशामुक्ति का संकल्प

रायबरेली। जिले के खीरो थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत एकौनी में कथित नशे के कारोबार को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आया है। लंबे समय से स्मैक सहित अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री के आरोपों के बीच समाज तक फाउंडेशन ने गांव में नशामुक्ति अभियान को तेज करते हुए ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं।

समाज तक फाउंडेशन के डायरेक्टर विजय प्रताप सिंह के एकौनी पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों ने एक-एक कर अपनी बात रखी और आरोप लगाया कि नशे की समस्या ने गांव के युवाओं और कई परिवारों को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौके पर समाज तक फाउंडेशन की मीडिया टीम भी मौजूद रही।

25 साल से नशे के कारोबार का दावा

ग्रामीणों ने दावा किया कि गांव में करीब 25 वर्षों से स्मैक का कारोबार चल रहा है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्मैक के अलावा गांजा, शराब और नशीले इंजेक्शन भी कथित रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों ने पुलिस और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल है कि यदि गांव में इतने लंबे समय से नशे की उपलब्धता की शिकायतें हैं, तो नशे की सप्लाई आखिर कहां से आ रही है और इसके पीछे कौन लोग हैं?

पुलिस और आबकारी विभाग से जवाबदेही की मांग

ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय नशे की सप्लाई चेन और मुख्य स्रोत तक पहुंचना जरूरी है।

किसी विभाग या अधिकारी पर संरक्षण का आरोप जांच के बिना साबित नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि ग्रामीणों के दावे सही पाए जाते हैं तो यह सवाल जरूर उठेगा कि इतने लंबे समय तक कथित कारोबार पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग सकी।

“जान की बाजी लगा देंगे, गांव को नशामुक्त बनाएंगे”

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए विजय प्रताप सिंह ने नशे के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लेते हुए कहा कि वह एकौनी को नशामुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा, “हम जान की बाजी लगा देंगे, लेकिन इस गांव को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिए संघर्ष करेंगे। इसके लिए हमें जो भी बलिदान देना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे।”

विजय प्रताप सिंह ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ है, क्योंकि इसकी सबसे बड़ी कीमत गांव के नौजवान चुका रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताई अपनी पीड़ा

मौके पर ग्रामीणों ने कहा कि नशे के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। कुछ ग्रामीणों ने गांव की सड़क, विकास और बहन-बेटियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उनका कहना था कि गांव में नशे का प्रभाव कम होना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित वातावरण मिल सके।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

समाज तक फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि नशामुक्ति अभियान को केवल एक दिन की गतिविधि तक सीमित नहीं रखा जाएगा। संगठन की ओर से ग्रामीणों को जागरूक करने और प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंचाने का प्रयास जारी रखने की बात कही गई है।

अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायतों पर पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग क्या कार्रवाई करते हैं, और क्या नशे की कथित सप्लाई के स्रोत तक पहुंचकर पूरे मामले का खुलासा किया जाता है।

एकौनी से उठी नशामुक्ति की यह आवाज अब प्रशासन के लिए एक गंभीर सवाल है—क्या गांव के युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए निर्णायक कार्रवाई होगी?

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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