अवैध लकड़ी कटान पर गंभीर सवाल, कार्रवाई के बजाय ट्रैक्टर-ट्रॉला छोड़ने का आरोप
रायबरेली। विकासखंड सताँव क्षेत्र में कथित अवैध रूप से महुआ और नीम के पेड़ों की कटान के मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, पेड़ों की कटान के बाद लकड़ी से लदा ट्रैक्टर-ट्रॉला मौके पर पकड़े जाने की बात सामने आई, लेकिन आरोप है कि उसे थाने में जमा कराने के बजाय मौके से ही छोड़ दिया गया।
मामले में फॉरेस्टर महेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि महेंद्र सिंह ने लकड़ी लदा ट्रैक्टर-ट्रॉला पकड़ा और यह कहा कि उनके साथ राजू सिंह दीवान हैं तथा वाहन को थाने ले जाया जा रहा है। हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार करीब दो घंटे इंतजार के बाद भी लकड़ी से लदा ट्रैक्टर-ट्रॉला थाने नहीं पहुंचा।
मामले की सूचना डीएफओ स्टेनो को दो बार दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद यदि जब्त वाहन और लकड़ी को नियमानुसार कब्जे में लेकर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह वन विभाग की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
सूत्रों के मुताबिक लकड़ी कटान में शामिल ठेकेदार का नाम श्रीराम बताया जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र एवं विभागीय जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अवैध कटान से सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। यदि लकड़ी वैध अनुमति के बिना काटी गई है तो उससे संबंधित जुर्माना अथवा अन्य देय राशि सरकारी खजाने में जमा हुई या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
मामले की शिकायत 1076 पर किए जाने की जानकारी है। वहीं सदर रेंजर, रायबरेली से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध लकड़ी से लदा वाहन पकड़ा गया था तो वह थाने में क्यों नहीं पहुंचा? कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी ने आगे क्या कदम उठाए? और सूचना मिलने के बाद उच्चाधिकारियों ने मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया?
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर केवल पौधरोपण की बातें करने से काम नहीं चलेगा। पेड़ों की अवैध कटान रोकना और सरकारी राजस्व की सुरक्षा करना वन विभाग की मूल जिम्मेदारी है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत जांच में प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
समाजतक फाउंडेशन के डायरेक्टर विजय प्रताप सिंह ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, मौके से काटी गई लकड़ी की मात्रा, वाहन की स्थिति, अनुमति/परमिट और सरकारी राजस्व से जुड़े अभिलेखों की जांच हो तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
नोट: फॉरेस्टर महेंद्र सिंह, राजू सिंह दीवान और कथित ठेकेदार श्रीराम से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।


