ठेके बंद, फिर भी ‘जहर’ की बिक्री! 15 अगस्त पर एकौनी में कथित नशे के कारोबार ने आबकारी-पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
रायबरेली। 15 अगस्त—जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी दिन रायबरेली के हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र में नशे के कथित अवैध कारोबार को लेकर सामने आई तस्वीरों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। शराब के ठेके बंद थे, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार एकौनी गांव में नशीले पदार्थों की खरीदारी के लिए लोगों की आवाजाही जारी रही।
सवाल बेहद सीधा है—जब निगरानी और कार्रवाई के लिए पुलिस तथा आबकारी विभाग की पूरी व्यवस्था मौजूद है, तो प्रतिबंध के दिन भी नशे का कथित कारोबार कैसे चल रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि अधिकारियों तक बार-बार शिकायतें और सूचनाएं पहुंचाई गईं, बावजूद इसके समस्या पर अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
कागजों पर कार्रवाई या जमीन पर भी?
अब सवाल आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे हैं। यदि शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं और ग्रामीण खुले तौर पर नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, तो जिम्मेदार विभागों को मौके पर जाकर जांच करने में आखिर परेशानी क्या है?
क्या सिर्फ शिकायत दर्ज होना ही कार्रवाई है, या फिर अवैध नशे के स्रोत तक पहुंचकर उसे बंद करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है?
ग्रामीणों का कहना है कि नशे का यह कथित कारोबार युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। उनका आरोप है कि लंबे समय से इसकी समस्या बनी हुई है और अब गांव के लोग चुप बैठने के लिए तैयार नहीं हैं।
विजय प्रताप सिंह ने छेड़ी नशामुक्ति की मुहिम
समाज तक की ओर से विजय प्रताप सिंह ने भी इस मामले को लेकर नशामुक्ति अभियान तेज करने की बात कही है। उनका कहना है कि जब तक गांव को नशे से मुक्त कराने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठते, तब तक आवाज उठाई जाती रहेगी।
ग्रामीण भी अभियान में सामने आ रहे हैं और उनका कहना है कि वे अपने गांव की युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
15 अगस्त को व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा सवाल
स्वतंत्रता दिवस के दिन सामने आए इन आरोपों ने पुलिस और आबकारी विभाग के सामने एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है—अगर ठेके बंद होने के बावजूद नशीले पदार्थों की कथित बिक्री जारी है, तो निगरानी व्यवस्था आखिर किसके लिए है?
अब प्रशासन को आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी होगी। यदि अवैध नशे की बिक्री प्रमाणित होती है तो केवल छोटे विक्रेताओं तक कार्रवाई सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्योंकि यह केवल कानून तोड़ने का मामला नहीं—यह युवाओं की जिंदगी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।

