
सताँव में विकास कार्यों की हकीकत पर सवाल, 1.49 करोड़ के उत्सव लॉन और मां गौरा पार्वती स्थल की बदहाली ने बढ़ाई चिंता
रायबरेली। विकासखंड सताँव के सताँव गांव में सरकारी विकास कार्यों और सार्वजनिक स्थल की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। समाज तक फाउंडेशन के डायरेक्टर विजय प्रताप सिंह ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर मां गौरा पार्वती स्थल समेत आसपास के परिसर का निरीक्षण किया। मौके की स्थिति का वीडियो बनाकर सार्वजनिक किया गया है।
निरीक्षण के दौरान परिसर में गंदगी और अव्यवस्था दिखाई देने का दावा किया गया। सवाल यह है कि जिस स्थल की साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभागों एवं पंचायत की है, वहां इतनी बदहाल स्थिति कैसे बनी हुई है? यदि जिम्मेदार अधिकारी नियमित निगरानी कर रहे हैं तो फिर जमीनी स्तर पर व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। इसी परिसर के समीप करीब 1 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से उत्सव लॉन का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुपालन पर भी शिकायतें उठी हैं। विजय प्रताप सिंह का आरोप है कि कुछ स्थानों पर मानकों के विपरीत सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
इतनी बड़ी धनराशि के निर्माण कार्य में यदि गुणवत्ता से समझौता होता है तो यह केवल निर्माण की कमी नहीं, बल्कि सरकारी धन और जनता के भरोसे से खिलवाड़ का गंभीर विषय होगा। इसलिए निर्माण स्थल की तकनीकी जांच, सामग्री की गुणवत्ता, माप पुस्तिका और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच आवश्यक है।
विजय प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी रायबरेली से मांग की है कि पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेकर मौके का स्थलीय निरीक्षण और निष्पक्ष तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। साथ ही मां गौरा पार्वती स्थल और आसपास के परिसर की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के नाम पर बजट जारी होना ही विकास नहीं है। विकास की असली तस्वीर जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता, लापरवाही या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन के सामने है—क्या 1.49 करोड़ रुपये के इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होगी और मां गौरा पार्वती स्थल की बदहाल व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी तय होगी, या फिर शिकायतें और सवाल कागजों में ही दबकर रह जाएंगे?

