
कोरिहर में 70 किलो दूषित माल नष्ट, 500 लीटर दूध पर बड़ा सवाल! मंडलायुक्त रोशन जैकब तक पहुंची शिकायत, FSO कंचनलता और DO मानिक चंद्र की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
चार नमूने लिए तो दो ही सर्वे में क्यों भेजे गए? पोर्टल पर कार्रवाई अपडेट न होने और नमूना बदलने की आशंका से बढ़ा मामला—गौ-रक्षा पदाधिकारियों को कथित धमकी का भी आरोप
रायबरेली। सतांव विकासखंड की ग्राम पंचायत कोरिहर में छेना और दूध की गुणवत्ता को लेकर सामने आया मामला अब जिला स्तर से निकलकर मंडल और उच्च स्तर तक पहुंच गया है। मौके पर करीब 70 किलो खाद्य सामग्री नष्ट कराए जाने तथा लगभग 500 लीटर दूध मौजूद होने की जानकारी के बाद खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले को लेकर समाज तक फाउंडेशन के डायरेक्टर एवं पत्रकार विजय प्रताप सिंह ने लखनऊ मंडलायुक्त रोशन जैकब तथा ACF मंडल लखनऊ विनीत कुमार पांडे को फोन के माध्यम से जानकारी देने के साथ लिखित शिकायत भी की है। शिकायतकर्ता के अनुसार मामले में जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
दूध दूषित था तो स्रोत की जांच क्यों नहीं?
शिकायतकर्ता के मुताबिक मौके पर करीब 500 लीटर दूध मौजूद था, जिसमें कुछ दूध दूषित पाया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दूषित दूध आखिर कहां से आया? उसकी आपूर्ति का स्रोत क्या था और क्या उसकी गुणवत्ता की विधिवत जांच की गई?
इतना ही नहीं, यदि मौके पर खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई थी तो बगल की अन्य दुकानों की जांच और निगरानी क्यों नहीं की गई? क्या कार्रवाई केवल शिकायत में बताए गए प्रतिष्ठानों तक सीमित रही या पूरे क्षेत्र में खाद्य पदार्थों की जांच की गई—यह भी जांच का विषय है।
चार नमूने लिए गए, दो सर्वे में क्यों?
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू नमूना प्रक्रिया को लेकर है। शिकायतकर्ता के अनुसार मौके पर चार नमूने लिए गए, लेकिन केवल दो नमूनों को सर्वे में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
सवाल सीधा है—जब शिकायत मिलावट की थी और विधिक नमूने लिए गए थे, तो नमूनों की पूरी प्रक्रिया क्या अपनाई गई? कौन-सा नमूना किस सील और नंबर से दर्ज हुआ, किसके कब्जे में रहा और प्रयोगशाला तक कैसे पहुंचा?
अब नमूना बदले जाने की आशंका संबंधी सूचना भी सामने आ रही है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसी आशंका शिकायत के रूप में सामने आई है तो सील, नमूना नंबर, विभागीय रिकॉर्ड, पोर्टल एंट्री और प्रयोगशाला रिपोर्ट का मिलान कराना बेहद जरूरी है।
पोर्टल अपडेट पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने मौके पर हुई कार्रवाई को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यदि कार्रवाई और नमूना लेने की प्रक्रिया हुई थी तो उसका डिजिटल रिकॉर्ड कब और किस विवरण के साथ दर्ज किया गया—इसकी जांच भी पूरे मामले की वास्तविकता सामने ला सकती है।
FSO और DO की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मामले में FSO कंचनलता तिवारी एवं DO मानिक चंद्र सिंह की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने दोनों अधिकारियों की कार्रवाई की उच्चस्तरीय समीक्षा और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके साथ मौके पर गए कुछ गौ-रक्षा पदाधिकारियों को DO मानिक चंद्र सिंह की ओर से फोन पर कथित रूप से धमकी तथा FIR कराने की बात कही गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
अब मंडल स्तर पर जवाबदेही की बारी
विजय प्रताप सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या व्यापारी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मिलावट के गंभीर मुद्दे को प्रशासन के सामने लाना है।
उन्होंने मांग की है कि 70 किलो नष्ट कराए गए माल, 500 लीटर दूध, नमूना प्रक्रिया, सील एवं नंबर, पोर्टल रिकॉर्ड और प्रयोगशाला रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
अब मामला मंडलायुक्त रोशन जैकब तक पहुंच चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में दूध, नमूने और विभागीय कार्रवाई की पूरी तस्वीर क्या सामने आती है—और यदि कहीं लापरवाही या अनियमितता मिली तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
रायबरेली को मिलावटखोरी से मुक्त कराने के दावों के बीच कोरिहर प्रकरण ने खाद्य सुरक्षा तंत्र की निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

