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इकौनी में नशे के खिलाफ ग्रामीणों की हुंकार, 20-25 साल से चल रहे अवैध कारोबार पर उठे गंभीर सवाल
रायबरेली। खीरो थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत इकौनी में कथित रूप से खुलेआम चल रहे अवैध शराब, गांजा, स्मैक और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। गुरुवार को करीब दो दर्जन से अधिक ग्रामीण समाजतक फाउंडेशन कार्यालय पहुंचे और अपनी पीड़ा तथा गांव में नशे के कथित कारोबार की गंभीर स्थिति को मीडिया के सामने रखा।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से नशीले पदार्थों की बिक्री का सिलसिला जारी है। उनका कहना है कि दिन और रात बाहरी लोगों का गांव में आना-जाना लगा रहता है और नशे के कारण गांव का माहौल लगातार खराब हो रहा है। ग्रामीणों ने विशेष रूप से महिलाओं, बहन-बेटियों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
ग्रामीणों का दावा है कि यह समस्या 20 से 25 वर्षों से चली आ रही है। उनका कहना है कि कई बार प्रशासन तक शिकायत और आवाज पहुंचती है, कार्रवाई भी दिखाई देती है, लेकिन कुछ दिन बाद कथित रूप से वही गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है?
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे गरीब और अशिक्षित हो सकते हैं, लेकिन इतना जरूर समझते हैं कि नशे की गिरफ्त में आने वाली युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद हो रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर रोक नहीं लगी तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
इस मामले में समाजतक मीडिया ने ग्रामीणों की बात को रिकॉर्ड किया तथा संबंधित आबकारी विभाग, रायबरेली से भी मामले को लेकर वार्ता की गई। अब सवाल संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन से है कि आखिर इकौनी में लंबे समय से सामने आ रहे इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी और कथित अवैध नशे के कारोबार पर स्थायी रोक कब लगेगी?
आखिर कार्रवाई के बाद फिर कैसे शुरू हो जाता है कारोबार?
यदि ग्रामीणों की शिकायतों में सच्चाई है और प्रशासनिक स्तर पर समय-समय पर कार्रवाई होती रही है, तो कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद कथित रूप से नशे की बिक्री दोबारा शुरू होने का कारण क्या है? क्या कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है? क्या स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था कमजोर है? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या जिम्मेदार विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि कार्रवाई के बाद दोबारा ऐसी गतिविधियां शुरू न हों?
यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि गांव के बच्चों, युवाओं और महिलाओं के भविष्य एवं सुरक्षा से जुड़ा गंभीर जनहित का मामला है।
समाजतक फाउंडेशन के निदेशक विजय प्रताप सिंह ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले को शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने के साथ आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी ग्रामीणों की आवाज पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
समाजतक का सवाल स्पष्ट है—यदि इकौनी में नशे का कथित कारोबार वर्षों से चल रहा है, तो आखिर इसकी जड़ तक पहुंचकर स्थायी कार्रवाई कब होगी?

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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