
एकौनी के प्राथमिक विद्यालय में बदहाली का आलम: बंद पड़े शौचालय, गंदगी से बेहाल बच्चे—शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार बेखबर!
रायबरेली | विकासखंड खीरो | ग्राम पंचायत एकौनी
उत्तर प्रदेश के जनपद रायबरेली के विकासखंड खीरो अंतर्गत ग्राम पंचायत एकौनी के प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विद्यालय परिसर में बने शौचालयों की हालत देखकर साफ नजर आता है कि बच्चों की मूलभूत सुविधाओं को लेकर जिम्मेदार विभाग कितने गंभीर हैं।
मौके पर दिखाई दे रहा है कि विद्यालय के कई शौचालय बंद पड़े हैं और गंदगी से पटे हुए हैं। स्वच्छता और साफ-सफाई की व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। सवाल यह है कि जिस विद्यालय में नौनिहाल पढ़ने आते हैं, वहां उनके लिए स्वच्छ और उपयोग योग्य शौचालय तक उपलब्ध क्यों नहीं हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर शिकायतें भी की गईं, लेकिन अब तक प्रभावी समाधान नहीं हुआ। ऐसे में सवाल ग्राम पंचायत से लेकर संबंधित शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक से है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
एकौनी में सिर्फ विद्यालय की समस्या नहीं, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों द्वारा गांव में गांजा, शराब, स्मैक/ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों के कथित कारोबार को लेकर भी लगातार आवाज उठाई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
वहीं कुछ ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान एवं अन्य स्थानीय जिम्मेदारों पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जो व्यक्ति गांव की समस्याओं और कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे दबाने या किसी षड्यंत्र में फंसाने का प्रयास किया जाता है। यदि ये आरोप सही हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम नागरिक के अधिकारों के लिए बेहद गंभीर विषय है।
पुलिस पर भी ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों की ओर से पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस गांव में आती है और कथित तौर पर कमीशन लेकर चली जाती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आवश्यक है कि पुलिस विभाग इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराए और यदि आरोप गलत हैं तो स्थिति स्पष्ट करे तथा यदि कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्राम प्रधान, सचिव और खंड विकास अधिकारी की भूमिका पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्राम पंचायत की व्यवस्थाओं की निगरानी आखिर कौन करेगा?
यदि प्राथमिक विद्यालय के शौचालय लंबे समय से बंद हैं, परिसर में गंदगी है और ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं, तो ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, शिक्षा विभाग और खंड विकास कार्यालय की निगरानी व्यवस्था कहां है?
क्या जिम्मेदार अधिकारी कभी मौके पर निरीक्षण करते हैं?
क्या शिकायतों का कोई रिकॉर्ड देखा गया?
क्या विद्यालय में बच्चों के लिए शौचालय और स्वच्छता की व्यवस्था सुनिश्चित की गई?
और यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
समाज तक मीडिया की मांग है कि जिला प्रशासन, बेसिक शिक्षा विभाग और विकास विभाग की संयुक्त टीम एकौनी गांव एवं प्राथमिक विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण करे। विद्यालय के शौचालयों की स्थिति, सफाई व्यवस्था, ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों तथा ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
साथ ही नशे के कथित कारोबार और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए आरोपों की भी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर एकौनी की समस्याएं इसी तरह फाइलों और शिकायतों के बीच दबकर रह जाती हैं।
समाज तक मीडिया का सवाल साफ है—
आखिर एकौनी के ग्रामीणों को न्याय और बच्चों को मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी?
नोट: ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, शिक्षा विभाग, पुलिस एवं अन्य संबंधित पक्षों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

