
बीएलएस/जीरो मास कंपनी पर मनमानी कटौतियों का आरोप, उत्तर प्रदेश बैंक मित्र यूनियन ने एसबीआई प्रबंधन से की जांच की मांग
वाराणसी/लखनऊ, 14 जून 2026।
उत्तर प्रदेश बैंक मित्र यूनियन ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मुख्य महाप्रबंधक (वित्तीय समावेशन) को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर बीएलएस इंटरनेशनल (BLS International) एवं जीरो मास (Zero Mass) कंपनी पर सीएसपी (Customer Service Point) संचालकों के साथ कथित आर्थिक अनियमितताओं और मनमानी कटौतियों का गंभीर आरोप लगाया है। यूनियन ने मामले की स्वतंत्र ऑडिट जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा प्रभावित बैंक मित्रों को धनवापसी की मांग की है।
प्रदेश अध्यक्ष विभव कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि प्रदेश भर के अनेक सीएसपी संचालकों से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि बीएलएस एवं जीरो मास जैसी अधिकृत कॉर्पोरेट बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (CBC) कंपनियां बैंक मित्रों के KO Limit, CSP Wallet एवं Working Capital से बिना स्पष्ट सूचना और पारदर्शिता के विभिन्न मदों में कटौतियां कर रही हैं।
सर्विस मेंटेनेंस शुल्क के नाम पर 8 प्रतिशत कटौती का आरोप
यूनियन के अनुसार कंपनियों द्वारा बैंक मित्रों के मासिक कमीशन के आधार पर Service Maintenance Fee के नाम पर लगभग 8 प्रतिशत राशि काट ली जाती है, जबकि इसकी कोई स्पष्ट रसीद या विस्तृत विवरण संचालकों को उपलब्ध नहीं कराया जाता। पत्र में दावा किया गया है कि बैंकिंग अनुबंधों और नियमों में ऐसी कटौती का कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान नहीं है।
टीडीएस के नाम पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत कटौती
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि KO Limit, CSP Wallet एवं Working Capital से TDS के नाम पर 2 प्रतिशत तक अतिरिक्त कटौती की जा रही है, जिसकी भी स्पष्ट जानकारी और प्रमाण बैंक मित्रों को नहीं दिए जाते।
पारदर्शिता के अभाव पर उठाए सवाल
यूनियन ने कहा है कि बैंक मित्रों को यह तक नहीं बताया जाता कि उनके खाते से कौन-सी राशि किस मद में काटी गई है। कटौतियों का कोई ब्रेकअप, विवरण या आधिकारिक रसीद उपलब्ध न कराए जाने से बैंक मित्रों में असंतोष बढ़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत बैंक मित्रों की आय पर प्रभाव
पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्यरत बैंक मित्र पहले से ही सीमित आय पर काम कर रहे हैं। यूनियन का आरोप है कि विभिन्न प्रकार की कटौतियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के बैंक मित्रों के कुल मासिक कमीशन का लगभग 30 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्रों में 40 प्रतिशत तक हिस्सा कंपनियों द्वारा ले लिया जाता है।
यूनियन का कहना है कि इससे बैंक मित्रों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और वित्तीय समावेशन की सरकारी योजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संचालन खर्च भी स्वयं वहन करते हैं बैंक मित्र
ज्ञापन में कहा गया है कि सीएसपी केंद्रों के संचालन हेतु कार्यालय किराया, बिजली बिल, इंटरनेट, स्टेशनरी, प्रिंटर, बायोमेट्रिक उपकरण, फर्नीचर, बोर्ड-बैनर सहित अन्य सभी खर्च बैंक मित्र स्वयं वहन करते हैं। इसके बावजूद कमीशन का बड़ा हिस्सा विभिन्न शुल्कों के रूप में काट लिया जाता है।
उपकरण खरीद पर अतिरिक्त शुल्क का आरोप
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया है कि यदि कोई बैंक मित्र बीएलएस या जीरो मास के माध्यम से उपकरण खरीदता है तो उससे 30 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है।
यूनियन की प्रमुख मांगें
उत्तर प्रदेश बैंक मित्र यूनियन ने एसबीआई प्रबंधन से निम्नलिखित मांगें की हैं—
बीएलएस इंटरनेशनल एवं जीरो मास द्वारा की गई सभी कटौतियों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
प्रत्येक कटौती का मदवार और लिखित विवरण बैंक मित्रों को उपलब्ध कराया जाए।
भविष्य में बिना वैधानिक आधार के होने वाली कटौतियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पूर्व में काटी गई अनियमित राशि की पहचान कर प्रभावित बैंक मित्रों को रिफंड दिया जाए।
एसबीआई, बीसी कंपनियों और बैंक मित्र प्रतिनिधियों की त्रिपक्षीय बैठक आयोजित कर स्थायी समाधान निकाला जाए।
न्याय और पारदर्शिता की मांग
यूनियन ने अपने पत्र में विश्वास व्यक्त किया है कि भारतीय स्टेट बैंक का शीर्ष प्रबंधन इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेकर बैंक मित्रों के हितों की रक्षा करेगा तथा वित्तीय समावेशन व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
(नोट: यह समाचार उत्तर प्रदेश बैंक मित्र यूनियन द्वारा जारी ज्ञापन और उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित कंपनियों एवं अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
रिपोर्ट: समाज तक न्यूज़ पोर्टल
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