👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

रायबरेली की ग्राम पंचायत बरदर में “डिजिटल घोटाला” ?
फर्जी बिल–वाउचर से लाखों की निकासी का सनसनीखेज मामला
जनपद रायबरेली के विकास खंड सताँव अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 2025 के दौरान कराए गए विभिन्न विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर संदिग्ध और अप्रामाणिक बिल–वाउचर अपलोड कर भुगतान दर्शाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, जिन वाउचरों के आधार पर भुगतान किया गया है, उनमें न तो पंचायत सचिव के हस्ताक्षर पाए गए हैं और न ही ग्राम प्रधान की स्पष्ट स्वीकृति अंकित है। कई वाउचरों पर तिथि तक दर्ज नहीं है, वहीं अनेक मामलों में जीएसटी नंबर का उल्लेख भी नहीं किया गया है। इसके बावजूद लाखों रुपये का भुगतान दर्शाया जाना कई सवाल खड़े करता है।
बिना तारीख, बिना मोहर, बिना हस्ताक्षर… फिर भी भुगतान!
रिकॉर्ड बताते हैं कि
13 दिसंबर 2025 को परी ट्रेडर्स, जय नटवीर बाबा ब्रिक फील्ड तथा न्यू वर्मा मशीनरी स्टोर के नाम से हजारों रुपये के वाउचर लगाए गए, जिनमें न तो विधिवत प्रमाणिकता है और न ही आवश्यक विवरण।
इसी प्रकार 23 दिसंबर 2025 को हैंडपंप मरम्मत के नाम से लगभग एक लाख रुपये से अधिक का वाउचर पास किया गया, जिसमें न प्रधान के हस्ताक्षर हैं और न सचिव की संस्तुति।
7 नवंबर 2025 को आदर्श इंटरप्राइजेज, परी ट्रेडर्स, जय नटवीर बाबा ब्रिक फील्ड एवं देवता कंप्यूटर एंड स्टेशनरी के नाम से भी कई वाउचर अपलोड किए गए, जिनमें से अधिकांश अपूर्ण एवं संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं।
रिकॉर्ड में यह भी दर्शाया गया है कि “Construction of Road” जैसे कार्यों के नाम पर भी ऐसे वाउचर पास किए गए, जिनमें न कार्य की स्पष्ट जानकारी है और न ही भुगतान की विधिवत स्वीकृति।
पारदर्शिता के नाम पर पर्दे के पीछे खेल?
भारत सरकार द्वारा पंचायतों को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल पोर्टल की व्यवस्था की गई है, ताकि हर नागरिक कार्यों और भुगतान का विवरण देख सके। लेकिन बरदर ग्राम पंचायत के प्रकरण में यही डिजिटल सिस्टम अब भ्रष्टाचार के सबूतों का माध्यम बनता दिख रहा है।
जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल तकनीकी लापरवाही का नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से सरकारी धन की हेराफेरी का प्रतीत होता है। यदि जांच हुई तो कई जिम्मेदार चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
स्वतंत्र पत्रकार एवं समाजसेवी ने की उच्च स्तरीय शिकायत
इस पूरे मामले को लेकर स्वतंत्र पत्रकार एवं समाजसेवी विजय प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री कार्यालय, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज विभाग तथा जिलाधिकारी रायबरेली सहित उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में मांग की गई है कि—
✔ पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए
✔ सभी संदिग्ध भुगतानों पर तत्काल रोक लगे
✔ दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो
✔ सरकारी धन की रिकवरी कराई जाए
बड़ा सवाल – जिम्मेदार कौन?
अब सवाल यह उठता है कि
जब वाउचर बिना तारीख, बिना हस्ताक्षर और बिना जीएसटी के हैं,
तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
क्या यह सब ग्राम पंचायत स्तर पर हुआ या इसके पीछे ब्लॉक और जिला स्तर की भी मिलीभगत है?
प्रशासन की चुप्पी या कार्रवाई?
फिलहाल मामला सार्वजनिक हो चुका है और डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस पर लीपापोती करता है या फिर वास्तव में “जीरो टॉलरेंस नीति” के तहत दोषियों पर कार्रवाई होती है।
यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला रायबरेली का एक और बड़ा पंचायत घोटाला बन सकता है।

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

Leave a Comment