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कृष्णापुर ताला ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों में लाखों रुपये के घोटाले का आरोप, जांच की उठी मांग

रायबरेली। जनपद रायबरेली के विकासखंड सताँव अंतर्गत ग्राम पंचायत कृष्णापुर ताला में मनरेगा एवं ग्राम पंचायत विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिव की कथित मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया तथा गरीब मजदूरों और ग्रामीणों के अधिकारों पर डाका डाला गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विभिन्न विकास कार्यों एवं मनरेगा योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया, जबकि कई कार्यों की वास्तविक स्थिति और भुगतान अभिलेखों में भारी अंतर होने का दावा किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि कई मामलों में फर्जी बिल-वाउचर लगाकर सरकारी धन निकाला गया और कागजों पर कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान प्राप्त कर लिया गया।

समाज तक डिजिटल मीडिया के पास उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि अनेक भुगतान ऐसे कार्यों के नाम पर किए गए जिनकी वास्तविकता संदिग्ध है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर गरीब मजदूरों के अधिकारों का हनन होगा। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

अब सभी की निगाहें जनपद की जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले का किस प्रकार संज्ञान लेता है और क्या आरोपों की सत्यता की जांच के लिए स्वतंत्र जांच टीम गठित की जाती है या नहीं।

समाज तक डिजिटल मीडिया का स्पष्ट कहना है कि वह किसी भी प्रकार का आरोप बिना साक्ष्य और दस्तावेजों के प्रकाशित नहीं करता। उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों के आधार पर मामले को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा रहा है, ताकि निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।

मांग

ग्राम पंचायत कृष्णापुर ताला के सभी विकास कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए।

मनरेगा भुगतान एवं मस्टर रोल की स्वतंत्र जांच हो।

बिल-वाउचर एवं भुगतान अभिलेखों का ऑडिट कराया जाए।

दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों पर विधिक कार्रवाई की जाए।

सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जाए।

(नोट: यह समाचार प्राप्त दस्तावेजों एवं लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के उपरांत ही होगी। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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