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विकास की ‘सूखी’ गंगा: हरचंदपुर के गुरुबक्श गंज चौराहे पर बूंद-बूंद को तरसती जनता, क्या एसी कमरों में बैठे अधिकारियों को नहीं दिखती प्यास?
​रायबरेली (हरचंदपुर):
कहने को तो रायबरेली की हरचंदपुर विधानसभा में विकास की गंगा बह रही है, लेकिन हकीकत की जमीन पर यह गंगा पूरी तरह सूख चुकी है। विधानसभा के प्रमुख केंद्र गुरुबक्श गंज चौराहे की तस्वीरें चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि यहाँ ‘विकास’ सिर्फ सरकारी फाइलों और नेताओं के भाषणों तक सीमित है। आलम यह है कि इस भीषण गर्मी में राहगीरों और आम जनता का गला सूख रहा है, लेकिन प्रशासन ने यहाँ पीने के पानी की एक बूंद तक की व्यवस्था मुफ्त में नहीं की है।
​भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा जनता का हक
​गुरुबक्श गंज चौराहा, जहाँ रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है, वहां एक प्याऊ तक का न होना सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जनता का आरोप है कि सरकारी बजट तो पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन वह पैसा जनता की प्यास बुझाने के बजाय भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबें भरने में चला जाता है। यहाँ खड़ा हर व्यक्ति आज यह पूछ रहा है कि आखिर बुनियादी सुविधाओं के लिए भी उसे अपनी जेब क्यों ढीली करनी पड़ रही है?
​एसी कमरों में मदमस्त अधिकारी और मौन नेता
​एक तरफ क्षेत्रीय नेता मंचों से ‘सबका साथ, सबका विकास’ का राग अलापते हैं, तो दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी ठंडे एसी कमरों में बैठकर जनता की बदहाली का तमाशा देख रहे हैं। क्या इन साहबान को सड़क पर चलते उस मजदूर की प्यास दिखाई नहीं देती जिसके पास पानी की बोतल खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं? आखिर क्यों गुरुबक्श गंज जैसे व्यस्त चौराहे पर ठंडे पानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई?
​’समाज तक’ का सीधा सवाल
​’समाज तक’ इस कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार पर सीधे प्रहार करता है। क्या यह विकास का मॉडल है जहाँ जनता को पानी के लिए भी ‘त्राहिमाम’ करना पड़े? अधिकारियों की यह घोर लापरवाही और नेताओं की चुप्पी यह दर्शाती है कि उन्हें जनता के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है।
​चेतावनी: अगर जल्द ही चौराहे पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह प्यासी जनता आने वाले समय में जिम्मेदार कुर्सीधारियों को सत्ता की प्यास का अहसास जरूर कराएगी। पानी को व्यापार बनाने वाले इन सफेदपोशों और लापरवाह अधिकारियों को अब जवाब देना ही होगा।
​रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, समाज तक न्यूज़

Samaj Tak
Author: Samaj Tak

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